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सड़क से सोशल मीडिया तक छिड़ी जंग, पुलिस के लिए बढ़ी मुश्किलें

Saba Naaz
20 July 2026 6:59 PM IST
सड़क से सोशल मीडिया तक छिड़ी जंग, पुलिस के लिए बढ़ी मुश्किलें
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दिल्ली: सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ा। एक तरफ पुलिस को जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक बढ़ रही भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही अफवाहों और भ्रामक पोस्टों का जवाब भी देना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान सड़क पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पुलिस की सक्रियता देखने को मिली।

सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया से जुड़े सीजेपी आंदोलन ने सोमवार को अचानक बड़ा रूप ले लिया। शुरुआत में यह प्रदर्शन छात्रों के मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें राजनीतिक संगठनों और अन्य समूहों की भागीदारी बढ़ती गई। आंदोलन के दौरान जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत खराब होने और उन्हें अस्पताल ले जाए जाने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

दिल्ली पुलिस ने स्थिति को देखते हुए पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। पुलिस अधिकारियों ने लगातार हालात पर नजर बनाए रखी। इसी बीच जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई।

संसद मार्ग, जनपथ और रायसीना रोड जैसे संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। इस दौरान पुलिस पर पथराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें एक सब इंस्पेक्टर के घायल होने की जानकारी मिली। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज का भी सहारा लेना पड़ा।

पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जाने लगे। सीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने और पुलिस की सख्ती से जुड़े पोस्ट साझा किए।

दिल्ली पुलिस ने इन दावों की जांच कर कई पोस्टों को भ्रामक बताया। पुलिस के सोशल मीडिया सेल ने लगातार तथ्य सामने रखकर अफवाहों को रोकने की कोशिश की। पुलिस का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान जरूरी कार्रवाई की गई और सोशल मीडिया पर कुछ गलत जानकारियां फैलाई जा रही थीं।

प्रदर्शन के दौरान सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कई पोस्ट कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाया गया और एक नाबालिग लड़की के साथ भी कथित दुर्व्यवहार हुआ। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को जांच के बाद निराधार बताया।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर नेपाल के जेनजी आंदोलन का भी जिक्र किया गया। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों से आंदोलन को उसी तरह आगे बढ़ाने की अपील की गई। पुलिस अधिकारियों ने ऐसे पोस्टों को लेकर सतर्कता बरती और कहा कि कुछ लोग कानून व्यवस्था बिगाड़ने के लिए भ्रामक संदेश फैला सकते हैं।

सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाने के बाद आंदोलन ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया था। कई नेताओं ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए इस कदम को उचित बताया था।

दिल्ली पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वह एक साथ दो मोर्चों पर काम कर रही थी। एक ओर हजारों की संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करना था, तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही गलत सूचनाओं को रोकना था।

फिलहाल पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही है। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील की है। साथ ही लोगों से सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करने और उसे आगे साझा करने से बचने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों में सीजेपी आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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