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डिजिटल स्वास्थ्य पर 5वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित

Ratna Netam
9 Oct 2026 3:41 PM IST
डिजिटल स्वास्थ्य पर 5वीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित
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नई दिल्ली। भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की नेशनल मेडिकल लाइब्रेरी (NML) ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ERMED कंसोर्टियम पर पांचवीं एक-दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों में डिजिटल ज्ञान संसाधनों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करना था। सम्मेलन में डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच को अधिक प्रभावी बनाने और पुस्तकालयों के माध्यम से चिकित्सा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।इस वर्ष सम्मेलन का विषय "डिजिटल हेल्थ रिसोर्सेज: रीडिफाइनिंग एक्सेस थ्रू लाइब्रेरीज़" रखा गया। इसका हिंदी अर्थ है 'डिजिटल स्वास्थ्य संसाधन: पुस्तकालयों के माध्यम से पहुंच को नया रूप देना'। सम्मेलन में स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल जानकारी की उपयोगिता, चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में ज्ञान संसाधनों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी हुए शामिल
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डॉ. विनोद कोटवाल और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा शामिल हुए।इन वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों और चिकित्सा पुस्तकालयों के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अंतर्गत कार्यरत नेशनल मेडिकल लाइब्रेरी द्वारा किया गया।राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस प्रशिक्षण-सह-सम्मेलन में डिजिटल ज्ञान संसाधनों को स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम का विषय इस बात पर केंद्रित था कि आधुनिक पुस्तकालय डिजिटल माध्यमों से चिकित्सा संबंधी ज्ञान तक पहुंच को किस प्रकार बेहतर बना सकते हैं।
डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों की बढ़ती भूमिका
स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल संसाधनों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। चिकित्सा से संबंधित शोधपत्र, वैज्ञानिक अध्ययन, मेडिकल जर्नल और अन्य शैक्षणिक सामग्री अब डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराई जा सकती है।इन संसाधनों का उपयोग चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगियों के उपचार से जुड़े निर्णयों में किया जाता है। डिजिटल जानकारी तक पहुंच से डॉक्टरों, चिकित्सा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को विभिन्न विषयों पर उपलब्ध वैज्ञानिक सामग्री का अध्ययन करने में सहायता मिल सकती है।सम्मेलन में इसी विषय को प्रमुखता दी गई कि डिजिटल ज्ञान संसाधन स्वास्थ्य सेवा वितरण और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में वैज्ञानिक जानकारी की उपलब्धता और उसके प्रभावी उपयोग को भी महत्वपूर्ण माना गया।
ERMED कंसोर्टियम क्या है?
ERMED का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक रिसोर्सेज इन मेडिसिन है। यह चिकित्सा क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक ज्ञान संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है।ERMED कंसोर्टियम का उद्देश्य चिकित्सा संस्थानों और संबंधित उपयोगकर्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक जर्नल तथा अन्य डिजिटल शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच प्रदान करने में सहायता करना है।चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में वैज्ञानिक साहित्य की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। किसी भी चिकित्सा विषय पर नए अध्ययन, शोध निष्कर्ष और उपचार से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी को समझने के लिए विश्वसनीय संसाधनों की आवश्यकता होती है।ऐसी स्थिति में डिजिटल पुस्तकालय और इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों से जुड़ी व्यवस्थाएं चिकित्सा संस्थानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।नई दिल्ली में आयोजित पांचवीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का विषय भी इसी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर केंद्रित रहा।
चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने पर जोर
सम्मेलन में चिकित्सा शिक्षा में डिजिटल ज्ञान संसाधनों की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया। मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को अध्ययन के लिए विभिन्न प्रकार की वैज्ञानिक सामग्री की आवश्यकता होती है।डिजिटल पुस्तकालयों के माध्यम से शोधपत्र, शैक्षणिक जर्नल और चिकित्सा संबंधी अन्य जानकारी तक पहुंच आसान बनाई जा सकती है।इससे चिकित्सा विद्यार्थियों को अपने विषय से संबंधित अध्ययन सामग्री प्राप्त करने में सहायता मिलती है। साथ ही शिक्षकों और शोधकर्ताओं को भी वैज्ञानिक जानकारी का अध्ययन करने का अवसर मिलता है।डिजिटल संसाधनों की उपयोगिता केवल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल चिकित्सा अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों में भी किया जा सकता है।इसी कारण सम्मेलन में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने के विषय को भी प्रमुखता दी गई।
साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति का महत्व
सम्मेलन में साक्ष्य-आधारित क्लिनिकल प्रैक्टिस को मजबूत बनाने में डिजिटल संसाधनों की भूमिका पर जोर दिया गया।साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति का अर्थ है कि मरीजों के उपचार से जुड़े निर्णय लेते समय उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों, चिकित्सक के अनुभव और मरीज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।इस प्रक्रिया में विश्वसनीय चिकित्सा अनुसंधान और वैज्ञानिक अध्ययनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। डिजिटल संसाधनों के माध्यम से चिकित्सक विभिन्न चिकित्सा विषयों पर प्रकाशित वैज्ञानिक सामग्री तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं।हालांकि, किसी शोधपत्र या डिजिटल सामग्री की उपलब्धता मात्र से उपचार संबंधी निर्णय तय नहीं होते। वैज्ञानिक प्रमाणों की गुणवत्ता, मरीज की स्थिति और चिकित्सकीय विशेषज्ञता का मूल्यांकन भी आवश्यक होता है।सम्मेलन में डिजिटल ज्ञान संसाधनों के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए इसी प्रकार की साक्ष्य-आधारित चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
आधुनिक पुस्तकालयों की बदलती भूमिका
डिजिटल तकनीक के विस्तार के साथ पुस्तकालयों की भूमिका में भी बदलाव आया है। पहले पुस्तकालयों का उपयोग मुख्य रूप से पुस्तकों और मुद्रित पत्रिकाओं के अध्ययन के लिए किया जाता था, लेकिन अब इलेक्ट्रॉनिक संसाधन भी ज्ञान प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।चिकित्सा पुस्तकालयों के लिए यह बदलाव विशेष महत्व रखता है, क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र में वैज्ञानिक जानकारी का लगातार विस्तार होता रहता है।डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना और उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाना आधुनिक पुस्तकालय सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन का विषय इसी बदलाव को दर्शाता है। इसमें पुस्तकालयों के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य संसाधनों तक पहुंच को नए स्वरूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं में ज्ञान संसाधनों का महत्व
स्वास्थ्य सेवा वितरण में चिकित्सकीय जानकारी और वैज्ञानिक प्रमाणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य पेशेवरों को विभिन्न रोगों, उपचार पद्धतियों और चिकित्सा अनुसंधान से संबंधित जानकारी की आवश्यकता होती है।डिजिटल संसाधन इस जानकारी तक पहुंच उपलब्ध कराने का एक माध्यम हैं। इनके प्रभावी उपयोग से चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संबंधी गतिविधियों को सहायता मिल सकती है।नेशनल मेडिकल लाइब्रेरी द्वारा आयोजित पांचवीं राष्ट्रीय प्रशिक्षण-सह-कॉन्फ्रेंस ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और साक्ष्य-आधारित क्लिनिकल प्रैक्टिस में डिजिटल ज्ञान संसाधनों की भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा।यह आयोजन स्वास्थ्य क्षेत्र में आधुनिक पुस्तकालय सेवाओं और डिजिटल जानकारी तक पहुंच के महत्व को रेखांकित करता है।
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