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दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशन बंद, वांगचुक बोले—‘अघोषित इमरजेंसी’!

Ashish verma
10 Oct 2026 6:36 PM IST
दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशन बंद, वांगचुक बोले—‘अघोषित इमरजेंसी’!
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में शनिवार, 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी में व्यापक सुरक्षा प्रतिबंध लगाए गए। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की तैनाती के बीच कई राजनीतिक नेताओं, छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए देश की स्थिति को ‘अघोषित इमरजेंसी’ बताया। उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई नहीं होने पर अनशन या पदयात्रा पर विचार करने की बात कही है।
प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद किए गए। हालांकि, मेट्रो स्टेशनों की बंदी और मोबाइल इंटरनेट पर रोक की समयसीमा अलग-अलग है। उपलब्ध मेट्रो सूचना में प्रवेश-निकास संबंधी प्रतिबंध शुक्रवार रात नौ बजे से शनिवार शाम छह बजे तक बताए गए थे। वहीं, जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं शनिवार रात दस बजे तक बंद रखने की सूचना है। इसलिए सभी 45 मेट्रो स्टेशन रात दस बजे तक बंद रहने का दावा पुष्ट नहीं है। यात्रियों के लिए नवीनतम संचालन सूचना देखना आवश्यक है।
मेट्रो के प्रवेश और निकास द्वारों पर प्रतिबंध का अर्थ पूरी मेट्रो सेवा बंद होना नहीं है। प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखने की जानकारी दी गई थी, जबकि नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन को इससे अलग रखा गया। इस व्यवस्था से यात्रियों के लिए स्टेशन के बाहर निकलने या वहां से यात्रा शुरू करने में बाधा बनी। राजधानी के प्रमुख परिवहन केंद्रों तक पहुंचने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने और अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने की सलाह दी गई।
सोनम वांगचुक ने शनिवार को छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को उन्होंने एकता और शांति की अपील करते समय ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की थी। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सरकार संवाद के जरिए मुद्दों का समाधान निकालेगी और हिरासत में लिए गए लोगों को जल्द छोड़ा जाएगा। उनके अनुसार, रविवार तक रिहाई नहीं होने पर वह अनशन या पदयात्रा पर विचार करने के लिए मजबूर होंगे। यह उनकी सशर्त चेतावनी है; उन्होंने तत्काल अनशन शुरू करने की घोषणा नहीं की है।
वांगचुक ने प्रदर्शन से पहले भी युवाओं से शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने विभिन्न समूहों के नेताओं से एकजुट रहने और जिम्मेदारी दिखाने को कहा था। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाने की जानकारी भी दी थी। शनिवार की कार्रवाई के बाद उनका बयान आंदोलन के समर्थन में आया है। ‘अघोषित इमरजेंसी’ उनका राजनीतिक आकलन है, किसी औपचारिक आपातकाल की घोषणा की सूचना नहीं।
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के तहत बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। सुरक्षा संबंधी जानकारी के अनुसार, 35 हजार से अधिक जवानों की तैनाती, छह निर्धारित हिरासत केंद्र और निगरानी के लिए ड्रोन, सीसीटीवी तथा चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक की व्यवस्था की गई। पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान बॉडी कैमरे इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इन कैमरों की रिकॉर्डिंग से किसी टकराव की परिस्थितियों और पुलिस व्यवहार से जुड़े आरोपों की जांच में मदद मिल सकती है।
पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद आयोजकों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। जंतर-मंतर तक पहुंच नियंत्रित किए जाने के बीच शहर के दूसरे हिस्सों में भी छोटे समूहों ने विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा थी। आंदोलनकारी एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। मतदाता सूची में बदलाव से संबंधित उनके आरोप आंदोलन का आधार हैं, जिन्हें आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिन के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। तृणमूल सांसद साकेत गोखले ने इस संबंध में जानकारी दी। अलग-अलग समय पर हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर भिन्न आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए अंतिम पुष्ट संख्या के बिना किसी एक आंकड़े को निश्चित बताना उचित नहीं होगा।
सड़क और रेल यात्रा भी प्रतिबंधों से प्रभावित हुई। मध्य दिल्ली में कई रास्तों पर डायवर्जन लागू किए गए। लंबी दूरी की कुछ ट्रेनें रद्द हुईं, जबकि कुछ के समय में बदलाव किया गया। मुंबई से दिल्ली आने वाली राजधानी सेवाओं सहित प्रभावित ट्रेनों के यात्रियों को संशोधित कार्यक्रम देखने की सलाह दी गई। प्रदर्शन, हिरासत और सुरक्षा प्रतिबंधों के बीच राजधानी में आवागमन की स्थिति बदलती रही। फिलहाल यात्रियों के लिए मेट्रो, रेलवे और यातायात संबंधी ताजा आधिकारिक सूचना के आधार पर निकलना सबसे उपयोगी है।
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