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दिल्ली-एनसीआर
रावण के साथ जला 30 फीट का कॉकरोच, भड़की सियासत, FIR की मांग
Shubhra Nandy
21 Oct 2026 6:51 AM IST

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सौरभ भारद्वाज ने खोला मोर्चा
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस बार दशहरे के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच के पुतले का दहन भी चर्चा का विषय बन गया। पीतमपुरा के नेताजी सुभाष प्लेस स्थित डीडीए मैदान में आयोजित रामलीला समारोह के दौरान दिल्ली सरकार के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने कॉकरोच के पुतले को आग लगाई। इस आयोजन के बाद दिल्ली की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कदम बताया है। उन्होंने उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजकर आयोजकों तथा संबंधित बीजेपी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
रावण के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का भी दहन
दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में श्री केशव रामलीला कमेटी की ओर से दशहरा समारोह का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम में पारंपरिक रूप से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले लगाए गए थे। इस बार आयोजकों ने एक अलग प्रयोग करते हुए करीब 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी तैयार कराया था। समारोह के दौरान इसका भी दहन किया गया। कार्यक्रम देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मैदान में पहुंचे थे। कॉकरोच के विशाल पुतले की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद इस आयोजन की चर्चा सोशल मीडिया पर भी होने लगी।
सौरभ भारद्वाज ने की FIR दर्ज करने की मांग
आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को इस मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत भेजी। उन्होंने श्री केशव रामलीला कमेटी के अध्यक्ष और बीजेपी विधायक अशोक गोयल देवराहा, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा तथा अन्य आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि हिंदू धर्म की पारंपरिक मान्यताओं से जुड़े दशहरा उत्सव में कॉकरोच का पुतला जलाना धार्मिक परंपराओं के साथ अनुचित हस्तक्षेप है। उनका कहना है कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इस धार्मिक आयोजन का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
धार्मिक भावनाएं आहत करने का लगाया आरोप
सौरभ भारद्वाज ने अपनी शिकायत में कहा कि रामलीला और दशहरा भारतीय संस्कृति तथा सनातन परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉकरोच के पुतले को पारंपरिक पुतलों के साथ जलाने का निर्णय धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। भारद्वाज ने यह भी आशंका जताई कि इस तरह के प्रतीकात्मक आयोजनों से समाज में राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मामले की जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आयोजन से संबंधित आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो और प्रचार सामग्री हटाने की मांग भी की। भारद्वाज ने चेतावनी दी कि अगर उनकी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। हालांकि, शिकायत दर्ज किए जाने का अर्थ एफआईआर दर्ज होना नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
कपिल मिश्रा ने AAP पर किया पलटवार
इस विवाद के बाद दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला। मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'कॉकरोच का पुतला जलाया जा रहा है और इससे देश की राजनीति के दीमकों को तकलीफ हो रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूह देश के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। साथ ही दावा किया कि अंत में सच्चाई की जीत होगी। कपिल मिश्रा की प्रतिक्रिया के बाद बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
आयोजकों ने बताया स्वच्छता का संदेश
वहीं, श्री केशव रामलीला कमेटी ने इस आयोजन के पीछे किसी राजनीतिक उद्देश्य से इनकार किया है। कमेटी के अध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि कॉकरोच गंदगी और अस्वच्छ परिस्थितियों का प्रतीक है। इसका पुतला जलाने का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था। आयोजकों के मुताबिक, जिस तरह दशहरे पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाता है, उसी तरह कॉकरोच के पुतले के माध्यम से गंदगी और उससे जुड़ी समस्याओं को समाप्त करने का संदेश दिया गया। समिति का कहना है कि इससे पहले भी सामाजिक समस्याओं के प्रतीकात्मक पुतले जलाए जा चुके हैं। आयोजकों ने इस कार्यक्रम का किसी विशेष राजनीतिक दल या आंदोलन से संबंध होने से इनकार किया है।
कॉकरोच जनता पार्टी से क्यों जोड़ा जा रहा मामला?
इस पूरे विवाद को हाल के दिनों में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से भी जोड़कर देखा जा रहा है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में युवाओं का एक समूह विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन करता रहा है। इस आंदोलन में कॉकरोच को एक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सवालों को लेकर भी यह संगठन चर्चा में रहा है। ऐसे समय में दशहरे के अवसर पर कॉकरोच का पुतला जलाए जाने से राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे। हालांकि, रामलीला आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि उनके कार्यक्रम का CJP आंदोलन से कोई संबंध नहीं था। इस विवाद पर अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने कॉकरोच के पुतले को लेकर मिल रही चर्चा पर व्यंग्यात्मक अंदाज में मुफ्त प्रचार मिलने की बात कही।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
कॉकरोच के पुतले के दहन को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे स्वच्छता का संदेश देने वाला रचनात्मक प्रयास बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक उत्सव में इस तरह के प्रतीक को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। राजनीतिक दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मामला धार्मिक परंपराओं, अभिव्यक्ति और राजनीतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा का विषय बन गया। दिल्ली में दशहरे के दौरान कॉकरोच के पुतले का दहन अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। एक ओर आयोजक इसे स्वच्छता जागरूकता का अभियान बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सौरभ भारद्वाज की शिकायत के बाद अब देखना होगा कि दिल्ली पुलिस मामले में क्या कदम उठाती है। फिलहाल कॉकरोच के पुतले का दहन दिल्ली की राजनीति में एक नए विवाद का केंद्र बन गया है।
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