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Delhi दिल्ली हाल के वर्षों में दिल्ली के शहरी गरीबों के लिए आवास और पुनर्वास से जुड़े सबसे बड़े फैसलों में से एक के तहत, दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने मंगलवार को झुग्गी पुनर्वास नियमों में बड़े बदलाव को मंज़ूरी दी। इसके तहत 1 जनवरी 2025 तक बने JJ क्लस्टर में रहने वाले सभी योग्य परिवारों को पुनर्वास का लाभ मिलेगा। यह फ़ैसला DUSIB की 36वीं बोर्ड बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की।
पात्रता की नई समय-सीमा (कट-ऑफ) के साथ, सरकार का अनुमान है कि पुनर्वास कार्यक्रम के तहत लगभग 4-5 लाख परिवार, यानी करीब 20 लाख लोग अब पक्के घर पाने के योग्य हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, "दिल्ली में झुग्गी-बस्ती में रहने वालों के लिए ऐतिहासिक फ़ैसला लिया गया है। 1 जनवरी 2025 तक बसे सभी योग्य परिवारों को पुनर्वास का लाभ मिलेगा।"
इस कदम से राजधानी में पुनर्वास का दायरा काफी बढ़ने की उम्मीद है। इससे उन हज़ारों परिवारों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी, जो पहले पात्रता नियमों के कारण इससे बाहर थे। इस फ़ैसले के असर पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "लगभग 4-5 लाख परिवारों के लिए पक्के घर का रास्ता साफ़ हो गया है, जिससे करीब 20 लाख लोगों को फ़ायदा होगा।"
बैठक में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव राजीव वर्मा और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि यह फ़ैसला केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हाल ही में हुई उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक के नतीजों के आधार पर और 'दिल्ली झुग्गी और JJ क्लस्टर पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति, 2026' के प्रावधानों के अनुसार लिया गया है।
मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि यह पहल आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को सम्मानजनक आवास और बेहतर जीवन-स्तर उपलब्ध कराने के केंद्र के विज़न को दर्शाती है। केंद्र के आवास विज़न का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'हर गरीब परिवार के लिए पक्का घर' के विज़न को दिल्ली में नई गति मिल रही है।" सरकार के अनुसार, योग्य लाभार्थियों को ज़रूरी नागरिक सुविधाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस बहु-मंज़िला फ़्लैट दिए जाएंगे।
पुनर्वास कार्यक्रम के तहत परिवारों को उनकी मौजूदा बस्तियों के भीतर या उनके जितना हो सके उतना पास बसाने की कोशिश की जाएगी, जो 'इन-सीटू' (मौजूदा जगह पर ही) पुनर्वास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। इस वादे को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "'जहां झुग्गी, वहां मकान' के वादे को और मज़बूत किया जाएगा और आधुनिक सुविधाओं वाले बहुमंज़िला फ़्लैट दिए जाएंगे।"
अधिकारियों ने बताया कि सरकार का मकसद सिर्फ़ घर देना ही नहीं है। प्रस्तावित पुनर्वास कॉलोनियों को बेहतर सामाजिक और नागरिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा, जिनमें आंगनवाड़ी केंद्र, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों के खेल के मैदान और अन्य ज़रूरी सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी, ताकि वहां रहने वालों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सके।
नई पॉलिसी में झुग्गी बस्तियों (JJ क्लस्टर) में बदलते पारिवारिक ढांचे और आबादी बढ़ने को भी ध्यान में रखा जा रहा है। सरकार ऐसे प्रावधानों पर विचार कर रही है जिनके तहत एक ही झुग्गी ढांचे की अलग-अलग मंज़िलों पर अलग-अलग यूनिट में रहने वाले एक ही परिवार के सदस्यों को भी पुनर्वास योजना में शामिल किया जा सके, बशर्ते वे तय अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करें। घर को सम्मान और सुरक्षा का मामला बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फ़ैसला दिल्ली के लाखों निवासियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार के आपसी सहयोग से झुग्गी में रहने वालों के जीवन में बड़े बदलाव आएंगे। पुनर्वास कार्यक्रम को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के ज़रिए मिशन मोड में लागू किया जाएगा। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र परिवार को सुरक्षित, पक्का और बेहतर घर मिल सके।





