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1984 दंगे: DSGMC प्रमुख बोले, सत्य आयोग बने, न्याय मिले
jantaserishta.com
1 Nov 2025 8:43 PM IST

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Delhi दिल्ली। 1984 के सिख दंगों को चार दशक बीत चुके हैं, लेकिन न्याय की लड़ाई अब भी जारी है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के प्रमुख हरमीत सिंह कालका ने शनिवार को कहा कि सिख समुदाय बीते 40 सालों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि “1984 में हजारों सिखों को जिंदा जला दिया गया था, लेकिन आज भी उन निर्दोषों को न्याय नहीं मिल सका है।” कालका ने मांग की कि केंद्र सरकार एक ‘सत्य आयोग (Truth Commission)’ गठित करे और 1984 की हिंसा को ‘जनसंहार (Genocide)’ घोषित करे।
हर साल मनाया जाता है यह कार्यक्रम
हरमीत सिंह कालका ने कहा कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हर साल इस कार्यक्रम का आयोजन करती है ताकि उन लोगों को याद किया जा सके जिन्होंने 1984 में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा, “हम अपने शहीद भाइयों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और देश को याद दिलाते हैं कि यह सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि न्याय की अधूरी कहानी है।”
उन्होंने कहा कि 1984 की घटना किसी समुदाय या राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध थी। “हमें इंसाफ चाहिए, बदला नहीं। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
“सत्य आयोग बने, ताकि सच सामने आए”
कालका ने कहा कि सत्य आयोग का गठन बेहद आवश्यक है ताकि उन घटनाओं की सच्चाई सामने आ सके, जो वर्षों से राजनीतिक और कानूनी भूलभुलैया में दब गई हैं। उन्होंने कहा कि कई पीड़ित परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। “यह आयोग न सिर्फ अपराधियों की पहचान करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि कैसे शासन तंत्र ने उस समय अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफलता दिखाई।”
जनसंहार घोषित करने की मांग
हरमीत सिंह कालका ने कहा कि 1984 की हिंसा को आधिकारिक रूप से जनसंहार घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “इस घटना में हजारों लोगों को उनकी धार्मिक पहचान के कारण मार दिया गया। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, यह जनसंहार की परिभाषा में आता है। जब तक इसे मान्यता नहीं दी जाएगी, न्याय अधूरा रहेगा।”
सरकार से न्यायिक कार्रवाई तेज करने की अपील
DSGMC प्रमुख ने केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों से अपील की कि इस मामले से जुड़े सभी लंबित मुकदमों को जल्द से जल्द निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में गवाह बूढ़े हो चुके हैं या अब जीवित नहीं हैं। इसलिए, समय रहते न्याय सुनिश्चित करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
पीड़ित परिवारों का दर्द अब भी ताजा
कार्यक्रम में मौजूद कई पीड़ित परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि चार दशक बीतने के बाद भी जले हुए घरों और लाशों की तस्वीरें आज भी दिमाग में ताजा हैं। “हमारे पिता, भाई, बेटे सबको हमने खो दिया। हर साल हम उम्मीद करते हैं कि इस बार कुछ न्याय मिलेगा, लेकिन अभी भी हमें इंतजार है।”
हरमीत सिंह कालका ने कहा, “यह केवल सिखों की नहीं, बल्कि इंसानियत की लड़ाई है। जब तक सच सामने नहीं आता और दोषियों को सजा नहीं मिलती, हमारी आवाज़ नहीं रुकेगी।
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