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मिडिल ईस्ट संघर्ष में 16 भारतीयों की मौत, 75 घायल; सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और अस्थिर हालात के बीच इस साल अब तक 16 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। इनमें 10 नाविक भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी। सरकार ने बताया कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नागरिकों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास के सवाल के लिखित जवाब में मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण प्रभावित हुए भारतीयों की स्थिति के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 16 भारतीयों की जान गई है, जबकि 75 भारतीय घायल हुए हैं।
मंत्री ने बताया कि संघर्ष के दौरान मारे गए भारतीयों में 10 नाविक शामिल थे। उन्होंने कहा कि मृतकों में सऊदी अरब में एक, कुवैत में दो, ओमान में आठ, इराक में एक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में चार भारतीय नागरिक शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, मिडिल ईस्ट क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इनमें से कई लोग समुद्री क्षेत्र, निर्माण, सेवा और अन्य रोजगार क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद भारतीय दूतावासों और मिशनों ने प्रभावित नागरिकों तक सहायता पहुंचाने के लिए कदम उठाए।
विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि संघर्ष के दौरान हजारों भारतीय नागरिकों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई गई। इसमें सुरक्षा संबंधी सलाह, स्थानीय स्तर पर मदद, संपर्क सुविधा और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकार विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है और संकट की स्थिति में संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखती है। भारतीय मिशनों को भी निर्देश दिए जाते हैं कि वे नागरिकों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सक्रिय रहें।
मिडिल ईस्ट लंबे समय से बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों का प्रमुख क्षेत्र रहा है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय नागरिक काम करते हैं और वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा संकट का सीधा असर भारतीय समुदाय पर भी पड़ता है।
सरकार ने संसद में बताया कि संघर्ष प्रभावित इलाकों में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए विशेष प्रयास किए गए। कई मामलों में स्थानीय प्रशासन और भारतीय मिशनों के सहयोग से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद की गई।
विदेश मंत्रालय समय-समय पर भारतीय नागरिकों के लिए यात्रा सलाह और सुरक्षा निर्देश भी जारी करता रहा है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे संबंधित दूतावासों के संपर्क में रहें और स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर केवल वहां रहने वाले लोगों पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और रोजगार पर भी पड़ता है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के वहां रहने के कारण भारत सरकार के लिए उनकी सुरक्षा एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन जाती है।
राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। संकट के समय भारतीय नागरिकों तक सहायता पहुंचाने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है।
मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण हुई भारतीय नागरिकों की मौत और चोटों की संख्या ने एक बार फिर विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, सरकार का कहना है कि वह स्थिति की लगातार निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी सहायता अभियान चलाए जाएंगे।
फिलहाल विदेश मंत्रालय की ओर से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।





