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दिल्ली में शुरू हुआ 12वां इंटरनेशनल साइबर लॉ कॉन्फ्रेंस 2025

SHIDDHANT
19 Nov 2025 9:36 PM IST
दिल्ली में शुरू हुआ 12वां इंटरनेशनल साइबर लॉ कॉन्फ्रेंस 2025
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Delhi दिल्ली। राजधानी दिल्ली के SCOPE कन्वेंशन सेंटर में मंगलवार को 12वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन साइबर लॉ, साइबरक्राइम एंड साइबर सिक्योरिटी 2025 की शुरुआत हुई। इस वैश्विक मंच पर दुनिया भर के साइबर विशेषज्ञ, नीति निर्धारक, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि जुटे। कॉन्फ्रेंस का फोकस तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में उभर रही चुनौतियों—विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक और साइबर सुरक्षा खतरों—पर केंद्रित रहा। सम्मेलन की शुरुआत में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई के विस्तार के साथ डीपफेक्स का दुरुपयोग विश्वभर में लोकतंत्र, समाज, उद्योग और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन गया है। चुनावों को प्रभावित करने, वित्तीय धोखाधड़ी करने और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में डीपफेक तकनीक के उपयोग ने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि साइबरक्राइम का परिदृश्य तेज़ी से बदल रहा है, और अब परंपरागत तकनीकी हमलों की जगह एआई-सक्षम हमले, फेक कंटेंट जनरेशन, डिजिटल मैनिपुलेशन और रैनसमवेयर के उन्नत संस्करण सामने आ रहे हैं। इससे न केवल कॉर्पोरेट सेक्टर बल्कि सरकारी संस्थानों और आम नागरिकों के डेटा को भी खतरा बढ़ गया है। कॉन्फ्रेंस में यह भी चर्चा हुई कि विश्वभर की सरकारें साइबर कानूनों में बदलाव कर रही हैं, लेकिन तकनीक जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे कानूनी ढांचा पीछे रह जाता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि वैश्विक सहयोग, रीयल-टाइम खतरा विश्लेषण, एआई रेगुलेशन, और साइबर फोरेंसिक क्षमता में वृद्धि इस नई डिजिटल दुनिया में बेहद जरूरी हैं।

कार्यक्रम में कई देशों के प्रतिनिधियों ने अपने साइबर सुरक्षा मॉडल और घरेलू कानूनों की प्रभावशीलता पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए। Indian Cyber Law Council के सदस्यों ने बताया कि आने वाले वर्षों में भारत को साइबर रेगुलेशन, डेटा प्रोटेक्शन और एआई नैतिकता के क्षेत्र में और मजबूती से कदम बढ़ाने होंगे। कॉन्फ्रेंस में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए वैश्विक रणनीतियों पर भी मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि साइबर सुरक्षा को विकसित करने के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी जरूरी है, ताकि व्यक्ति और संगठन दोनों साइबर हमलों से खुद को सुरक्षित रख सकें। तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय पैनल एआई-चालित खतरों, डिजिटल प्राइवेसी, ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर डिफेंस और डेटा सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा जारी रखेंगे।
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