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सरकार के 100 दिन: स्वच्छ Yamuna पर फोकस, लेकिन जिम्मेदार कौन?

Ashish verma
28 May 2025 7:30 PM IST
सरकार के 100 दिन: स्वच्छ Yamuna पर फोकस, लेकिन जिम्मेदार कौन?
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स्वच्छ यमुना पर फोकस

New Delhi.नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में यमुना की सफाई एक बड़ा चुनावी मुद्दा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की जनता से यमुना को दिल्ली की पहचान बनाने का वादा किया था। इस दिशा में काम शुरू हो गया है। तीन साल में यमुना को स्वच्छ और अविरल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस काम में किसी तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। पिछले महीने उन्होंने नदी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने और यमुना सफाई अभियान को जन आंदोलन बनाने की सलाह दी थी। इसी महीने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस काम की प्रगति की समीक्षा की है। यमुना के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण इसमें गिरने वाले 22 बड़े और अन्य छोटे नाले हैं। इनमें से केवल 11 नालों का पानी ही एसटीपी से शुद्ध होता है।

37 चालू एसटीपी में से केवल 12 ही मानक के अनुरूप हैं। इसे ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने सभी एसटीपी का थर्ड पार्टी से ऑडिट कराने और इनके अपग्रेडेशन के काम में तेजी लाने का फैसला किया है। नदी में स्वच्छ जल सुनिश्चित करने के लिए बजट में 40 विकेंद्रीकृत डीएसटीपी बनाने की घोषणा की गई है। व्यय वित्त समिति की पहली बैठक में 27 डीएसटीपी, टर्मिनल सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) और दिल्ली गेट पर 10 एमजीडी एसटीपी के निर्माण के लिए 3140 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। अमृत 2 योजना के तहत 13 के लिए केंद्र सरकार धन मुहैया कराएगी। यमुना में प्रदूषण के लिए नजफगढ़ नाला सबसे ज्यादा जिम्मेदार है। साहिबी नदी मिशन के तहत इसकी सफाई और पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाना है। पहले चरण में तिमारपुर से पंजाबी बाग तक 11 किलोमीटर हिस्से की सफाई की जा रही है।

इस हिस्से में 23 छोटे नालों का पानी नजफगढ़ नाले में गिरता है। इसे शुद्ध करने के लिए 27 में से 14 डीएसटीपी नजफगढ़ नाले के लिए होंगे। 11 डीएसटीपी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।यमुना की सफाई में चुनौतियां100% सीवेज ट्रीटमेंट की चुनौती, ताकि गंदा पानी नदी में न गिरे।पूरी दिल्ली में सीवर नेटवर्क उपलब्ध कराना। 1799 अनधिकृत कॉलोनियों और 639 झुग्गियों में सीवर नेटवर्क। इनमें से 1224 कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाई जा चुकी है और 159 में काम चल रहा है। 287 में यह काम होना बाकी है। 129 कॉलोनियों में वन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से एनओसी का इंतजार है।नदी में गिरने वाले 22 नालों में से सिर्फ 11 नालों का पानी रोककर शुद्ध किया जाता है। दो नालों के पानी को रोकने का काम चल रहा है।यमुना बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाना। डीडीए ने 1537 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाया है। अभी भी एक बड़े क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की चुनौती है।नजफगढ़ नाले में सबसे ज्यादा प्रदूषण गुरुग्राम से आता है। वहां भी इसकी सफाई सुनिश्चित करनी होगी।


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