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नोएडा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में नोएडा पुलिस ने कथित सैलून कर्मी रुचिका सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, रुचिका सिंह नोएडा के सेक्टर-168 क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही हैं। इस मामले में नोएडा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353 (1) और 356 (1) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, इन धाराओं के तहत आरोपी को दो से तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
मामले की शिकायत गाजियाबाद निवासी सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता स्मृति सिंह चंदेल ने दर्ज कराई है। अधिवक्ता ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायत के आधार पर नोएडा के एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में जीरो FIR दर्ज की गई है। पुलिस के मुताबिक, 23 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसी दौरान रुचिका सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता अधिवक्ता स्मृति सिंह ने आरोप लगाया है कि इस टिप्पणी से प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह के बयान समाज में तनाव और अशांति पैदा कर सकते हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टिप्पणी जानबूझकर लोगों की भावनाओं को आहत करने और सामाजिक माहौल खराब करने के उद्देश्य से की गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल मामले की जांच जारी है। एक्सप्रेसवे थाना पुलिस वीडियो फुटेज, कार्यक्रम से जुड़े रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
जांच एजेंसियां इस मामले में सोशल मीडिया गतिविधियों की भी पड़ताल कर सकती हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित टिप्पणी किस संदर्भ में की गई थी और कार्यक्रम के दौरान मौजूद अन्य लोगों की भूमिका क्या थी। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यह मामला सार्वजनिक मंचों पर नेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ की जाने वाली कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामलों की कड़ी में सामने आया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में बयान की प्रकृति, उद्देश्य और उसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है।
अधिवक्ता स्मृति सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि प्रधानमंत्री का पद केवल एक व्यक्ति का पद नहीं है, बल्कि देश के संवैधानिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस पद से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल रुचिका सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।





