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पैडी ट्रांसप्लांटर द्वारा धान की रोपाई से लागत में कमी

गरियाबंद: गरियाबंद जिले के कृषक धान की खेती में नवीन तकनीक व उन्नत कृषि अपनाकर उपज में वृद्धि कर रहे है, वहीं लागत और समय में कमी का लाभ भी उन्हें मिल रहा है। वर्तमान में बढ़ती मंहगाई के कारण खेती में लगने वाले लागत में तो वृद्धि हुई ही है अपितु रोपा लगाने के लिये मजदूरों की समस्या काफी जटिल है इस खरीफ वर्ष 2022 में रोपा लगाने हेतु प्रति एकड़ 5000 से 6000 रूपये की राशि मजदूरी पर व्यय किसानों द्वारा किया जाता है। लागत और समय में बचत हेतु अंचल के कई किसान तकनीकी खेती अपनाकर अब पैडी ट्रांसप्लांटर से धान की रोपाई कुशलतापूर्वक कर रहे हैं। फिंगेश्वर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम रोहिना के कृषक श्री कामजीत वर्मा ने पैडी ट्रांसप्लांटर के माध्यम से धान की रोपाई की राह को चुना। विगत कई वर्षो से परम्परागत रोपाई के कारण उन्हें पहले तो काफी तकनीकी समस्या आई फिर कृषि विभाग द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया एवं रोपा लगाने की विधि को विस्तार पूर्वक बताया गया। जिससे प्रेरित होकर कृषक ने धान रोपाई का कार्य पैडी ट्रांस्पलांटर से किया। श्री वर्मा के अनुसार खेती की लागत में भी कमी आई और उत्पादन भी पहले की तुलना में ज्यादा हुआ। मशीन द्वारा खेती करने से धान के खेत में कीड़े व बिमारियों की समस्या काफी कम हुई। किसान श्री वर्मा 3 वर्षों से पैडी ट्रांस्पलांटर के द्वारा धान की खेती कर रहे है। प्रथम वर्ष में फसल प्रदर्शन योजना अंर्तगत 7500 रूपये की अनुदान राशि कृषि विभाग द्वारा प्रदाय किया गया। श्री कामजीत वर्मा के पैडी ट्रांस्पलांटर मशीन से खेती व उसमें कम लागत को देखकर विकासखण्ड के ग्राम रावड़ के किसानों का भी रूझान बढ़ा है। ग्राम रावड़ के किसानों ने 8 हेक्टेयर में इस वर्ष खरीफ 2022 में पैडी ट्रांस्पलांटर से रोपाई की है। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री बी. आर. साहू ने बताया कि वर्तमान में मजदूर समय पर नहीं मिलते। जिससे किसान खेती में पिछड़ जाते है। कृषि का कार्य काफी समसमायिक होता है, यदि कृषक इसी तरह पैडी ट्रांस्पलांटर से खेती करते है, तो समय पर कृषि कार्य होगा, खेती के लागत में कमी आयेगी और आय में भी निश्चित वृद्धि होगी। पैडी ट्रांसप्लांटर से खेती करने हेतु धान की फसल की नर्सरी एक खास तरह की फ्रेम में लगानी होती है नर्सरी लगाने के 15 से 20 दिनों के भीतर धान की रोपाई मशीन से लाइन से की जाती है। रोपाई के पश्चात 20 से 25 दिवस में पैडी वीडर द्वारा खरपतवार का नियंत्रण किया जाता है जिससे धान के कंसों में भी वृद्धि होती है एवं खरपतवारनाशी पर होने वाले खर्च को भी काफी कम किया जा सकता है।
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