व्यापार
UPI पेमेंट पर लगेगा नया चार्ज PhonePe के सीईओ ने साफ कर दिया पूरा मामला
Ratna Netam
8 Aug 2026 6:31 PM IST

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बिजनेस : भारत में UPI का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों से UPI पेमेंट पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू किए जाने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। इन चर्चाओं के बीच PhonePe के CEO और फाउंडर समीर निगम ने स्पष्ट किया है कि आम ग्राहकों से UPI के जरिए भुगतान करने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि UPI भारतीय उपभोक्ताओं के लिए पहले भी मुफ्त था और आगे भी मुफ्त रहेगा। ऐसे में दुकान पर खरीदारी करने, बिल भरने, मोबाइल रिचार्ज करने या किसी व्यक्ति को पैसे भेजने वाले सामान्य यूजर्स को सीधे तौर पर ट्रांजैक्शन फीस देने की जरूरत नहीं होगी।
दरअसल, UPI से जुड़े संभावित MDR को लेकर भ्रम इसलिए पैदा हुआ क्योंकि सरकार की ओर से कानून में बदलाव का रास्ता साफ किया गया है। इसके तहत कुछ चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट पर MDR लगाए जाने की संभावना को लेकर चर्चा हो रही है। प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ बिजनेस या मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत तक MDR लगाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, MDR का मतलब ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला शुल्क नहीं है। यह मुख्य रूप से उस व्यापारी या कारोबारी से जुड़ा चार्ज होता है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करता है।
इसलिए अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर UPI के जरिए 500, 1,000 या सामान्य खरीदारी का भुगतान करता है, तो इस संभावित व्यवस्था के कारण उससे अलग से UPI फीस वसूलने की बात नहीं कही गई है। यही वजह है कि PhonePe के सीईओ के बयान को आम UPI यूजर्स के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
PhonePe के बयान के बाद Payments Council of India यानी PCI ने भी स्थिति स्पष्ट की है। PCI के मुताबिक, जहां MDR लागू हो सकता है, वहां यह पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होगी। इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि ग्राहक को UPI इस्तेमाल करने के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों को UPI स्वीकार करने पर MDR देने की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था देशभर में छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि लाखों दुकानदार रोजाना छोटे-छोटे भुगतान लेने के लिए UPI का इस्तेमाल करते हैं।
अब सवाल यह है कि आखिर MDR होता क्या है। आसान भाषा में समझें तो जब कोई ग्राहक डिजिटल माध्यम से किसी दुकान या कारोबारी को भुगतान करता है, तो उस ट्रांजैक्शन को पूरा करने के लिए बैंक, पेमेंट कंपनी और तकनीकी संस्थाओं का नेटवर्क काम करता है। इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े खर्च की भरपाई के लिए व्यापारी से एक शुल्क लिया जा सकता है, जिसे Merchant Discount Rate कहा जाता है। कार्ड से होने वाले भुगतान में MDR पहले से इस्तेमाल होने वाला मॉडल है, लेकिन UPI के मामले में ज्यादातर ट्रांजैक्शन लंबे समय से बिना MDR के होते रहे हैं।
UPI को साल 2016 में लॉन्च किया गया था और पिछले कुछ वर्षों में यह भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सर्विस प्रोवाइडर तक UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने की लागत भी बढ़ रही है।
UPI नेटवर्क को संचालित करने के लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने की व्यवस्था, ग्राहक सहायता और अन्य डिजिटल सुविधाओं पर लगातार निवेश करना पड़ता है। ऐसे में पेमेंट इंडस्ट्री में यह चर्चा होती रही है कि बड़े और अधिक मूल्य वाले कारोबारी ट्रांजैक्शन से कुछ राजस्व हासिल किया जा सकता है, जबकि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI को मुफ्त रखा जाए।
प्रस्तावित व्यवस्था में 2,000 रुपये की सीमा भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य छोटे और रोजमर्रा के भुगतानों को संभावित शुल्क से अलग रखना हो सकता है। दूध, सब्जी, किराना, छोटी खरीदारी या ऑटो-टैक्सी जैसे सामान्य भुगतान अक्सर इस सीमा के नीचे होते हैं। इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P पेमेंट को भी संभावित MDR व्यवस्था से अलग रखने की बात कही गई है। इसका मतलब है कि दोस्त, परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजने पर इस मर्चेंट चार्ज का असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, 0.25 से 0.4 प्रतिशत की दर को अभी अंतिम चार्ज नहीं माना जाना चाहिए। किन कारोबारियों पर MDR लागू होगा, 2,000 रुपये की सीमा कैसे काम करेगी, किन छोटे व्यापारियों को छूट मिलेगी और शुल्क की अंतिम दर क्या होगी, इन सवालों का जवाब अंतिम नियमों और अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए राहत की बात यही है कि संभावित MDR को लेकर चल रही चर्चा का मतलब यह नहीं है कि उन्हें हर UPI भुगतान पर फीस देनी होगी। आम ग्राहक के लिए UPI को मुफ्त रखने पर जोर दिया जा रहा है, जबकि संभावित शुल्क का फोकस चुनिंदा बड़े कारोबारी ट्रांजैक्शन पर हो सकता है। आने वाले समय में सरकार की अंतिम व्यवस्था से तस्वीर और साफ होगी।
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