
नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों और व्यापारियों के लिए यूपीआई (UPI) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के प्रस्ताव को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। इस विषय पर चर्चा के लिए 9 अक्टूबर को प्रस्तावित यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद 15 अक्टूबर से संभावित शुल्क लागू होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यूपीआई का संचालन करने वाली संस्था नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बैठक की नई तारीख घोषित नहीं की है। इसके साथ ही यह भी पुष्टि नहीं हुई है कि प्रस्तावित शुल्क को 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना पर आगे बढ़ा जाएगा या नहीं।
सामने आई जानकारी के अनुसार, यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 9 अक्टूबर को बैठक होनी थी। हालांकि, निर्धारित बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद प्रस्ताव से जुड़े अगले निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यूपीआई के सामान्य भुगतान पर कोई नया एमडीआर शुल्क लागू होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
9 अक्टूबर की बैठक नहीं हो सकी
यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक 9 अक्टूबर को प्रस्तावित थी।
इस बैठक में यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क लागू करने के प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी।
हालांकि, निर्धारित तारीख पर बैठक आयोजित नहीं हो सकी।
बैठक नहीं होने के कारण प्रस्ताव पर आगे की चर्चा और निर्णय की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि बैठक किस कारण से नहीं हो सकी।
इसी तरह बैठक को स्थगित करने के संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण भी सामने नहीं आया है।
ऐसे में प्रस्तावित शुल्क को लेकर किसी अंतिम निर्णय का दावा करना उचित नहीं होगा।
15 अक्टूबर से शुल्क लागू होने पर सवाल
यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित एमडीआर शुल्क को 15 अक्टूबर से लागू किए जाने की संभावना को लेकर चर्चा चल रही है।
हालांकि, एनपीसीआई ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।
संस्था की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि निर्धारित तारीख से प्रस्तावित व्यवस्था लागू की जाएगी या नहीं।
इसलिए 15 अक्टूबर से यूपीआई भुगतान पर नया शुल्क लगना तय है, ऐसा कहना गलत होगा।
फिलहाल इस विषय पर आधिकारिक निर्णय और स्पष्ट जानकारी का इंतजार है।
व्यापारियों और डिजिटल भुगतान से जुड़े पक्षों के लिए अंतिम नियमों की घोषणा महत्वपूर्ण होगी।
क्या होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से लिया जाने वाला शुल्क होता है।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था में यह शुल्क आमतौर पर भुगतान स्वीकार करने की सेवा से जुड़ा होता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है, तो कुछ भुगतान प्रणालियों में व्यापारी से लेनदेन की राशि के आधार पर शुल्क लिया जा सकता है।
एमडीआर को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह सामान्यतः व्यापारी से संबंधित शुल्क होता है, न कि सीधे ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क।
इसलिए यूपीआई पर एमडीआर लागू करने के प्रस्ताव का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि हर ग्राहक को भुगतान करते समय अतिरिक्त पैसे देने होंगे।
किससे, कितना और किन परिस्थितियों में शुल्क लिया जाएगा, यह अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा।
आम यूपीआई यूजर्स पर क्या होगा असर?
यूपीआई भारत में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है।
लोग इसका उपयोग दुकानों, ऑनलाइन सेवाओं और आपसी पैसों के लेनदेन के लिए करते हैं।
ऐसे में यूपीआई से संबंधित किसी भी शुल्क की खबर आम उपयोगकर्ताओं का ध्यान आकर्षित करती है।
हालांकि, वर्तमान जानकारी में सामान्य ग्राहकों से नया शुल्क लेने का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
प्रस्तावित एमडीआर मुख्य रूप से व्यापारी भुगतान से संबंधित विषय है।
इसलिए ग्राहकों को यह समझना जरूरी है कि व्यापारी से लिए जाने वाले शुल्क और ग्राहक पर लगाए जाने वाले शुल्क में अंतर होता है।
अभी किसी भी सामान्य यूपीआई भुगतान पर नए शुल्क की घोषणा मानकर चलना उचित नहीं होगा।
व्यापारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव?
यूपीआई के माध्यम से बड़ी संख्या में छोटे और बड़े व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।
ऐसे में यदि भविष्य में व्यापारी लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का निर्णय लिया जाता है, तो उसका प्रभाव भुगतान स्वीकार करने की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि, यह प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि शुल्क किन व्यापारियों पर लागू होता है और उसकी दर क्या निर्धारित की जाती है।
फिलहाल प्रस्तावित शुल्क की दर, पात्रता और अन्य शर्तों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसलिए छोटे दुकानदारों, बड़े व्यापारियों या किसी विशेष कारोबार पर निश्चित आर्थिक बोझ पड़ने का दावा अभी नहीं किया जा सकता।
एनपीसीआई की नई घोषणा का इंतजार
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया देश की यूपीआई भुगतान प्रणाली का संचालन करता है।
यूपीआई के माध्यम से विभिन्न बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच डिजिटल लेनदेन संभव होता है।
प्रस्तावित एमडीआर शुल्क पर चर्चा के लिए होने वाली बैठक नहीं हो पाने के बाद अब अगली तारीख का इंतजार है।
हालांकि, एनपीसीआई ने बैठक के लिए कोई नई तारीख घोषित नहीं की है।
संस्था की ओर से 15 अक्टूबर से शुल्क लागू किए जाने के संबंध में भी पुष्टि नहीं हुई है।
इस कारण प्रस्ताव के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या सभी यूपीआई लेनदेन पर लगेगा शुल्क?
इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित एमडीआर शुल्क किन प्रकार के यूपीआई लेनदेन पर लागू किया जा सकता है।
यूपीआई के जरिए व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति से व्यापारी के बीच भुगतान किया जाता है।
दोनों प्रकार के लेनदेन की प्रकृति अलग होती है।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट मुख्य रूप से व्यापारी भुगतान से संबंधित शुल्क है।
हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था में किन लेनदेन को शामिल किया जाएगा, इसकी अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है।
इसलिए सभी यूपीआई लेनदेन पर एक समान शुल्क लगाए जाने की बात की पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल मौजूदा नियमों में बदलाव की पुष्टि नहीं
यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित एमडीआर शुल्क को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
9 अक्टूबर की बैठक नहीं होने से निर्णय की स्थिति और स्पष्ट नहीं हो सकी है।
ऐसे में व्यापारियों और ग्राहकों को किसी संभावित शुल्क को अंतिम नियम मानने के बजाय आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।
शुल्क की दर, लागू होने की तारीख और भुगतान के प्रकार से संबंधित विवरण अंतिम घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।
15 अक्टूबर से पहले फैसले पर नजर
यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित एमडीआर शुल्क को लेकर अगला कदम क्या होगा।
फिलहाल एनपीसीआई ने न तो नई बैठक की तारीख बताई है और न ही 15 अक्टूबर से शुल्क लागू करने की पुष्टि की है।
इसलिए यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के लिए मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नया शुल्क लागू होने का कोई अंतिम आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
आने वाले दिनों में संबंधित संस्था की घोषणा से ही स्पष्ट होगा कि एमडीआर प्रस्ताव पर कब चर्चा होगी और इसे लागू करने के संबंध में क्या फैसला लिया जाएगा।





