Crude oil सस्ता होने पर भी भारत में क्यों नहीं मिलती तुरंत राहत?

Business बिजनेस : दुनिया भर में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। एक समय जहां कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर करीब 71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस गिरावट के चलते कई देशों में ईंधन की कीमतों में कमी भी देखी गई है।लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में अभी कोई बड़ी राहत नहीं दिख रही है। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल सस्ता हो गया है, तो भारत में इसका फायदा आम उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
इस सवाल का जवाब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हालिया बयान से समझा जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश की सरकारी तेल कंपनियां रिफाइनरी के लिए कच्चा तेल पहले से खरीदकर रखती हैं। आमतौर पर यह खरीद 1 से 2 महीने पहले की जाती है। ऐसे में अभी जो कच्चा तेल रिफाइनरियों में इस्तेमाल हो रहा है, वह अप्रैल या मई की शुरुआत में खरीदा गया था, जब कीमतें काफी ज्यादा थीं।इस व्यवस्था का सीधा असर यह होता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने का फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाता। मौजूदा समय में जो पेट्रोल और डीजल तैयार किया जा रहा है, उसकी लागत पहले की ऊंची कीमतों पर आधारित है। इसलिए कीमतों में बदलाव में देरी होती है।
सरकारी कंपनियों की यह इन्वेंट्री और खरीद प्रणाली तेल की आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए बनाई गई है, ताकि अचानक अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर तुरंत न पड़े। लेकिन इसका एक नुकसान यह भी है कि जब कच्चा तेल सस्ता होता है, तो उसका लाभ आम लोगों को तुरंत नहीं मिल पाता।जानकारों के अनुसार, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मौजूदा गिरावट बनी रहती है, तो आने वाले एक से दो महीनों में भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी देखने को मिल सकती है। लेकिन यह पूरी तरह तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर-रुपये के रुझान और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
इसके अलावा टैक्स स्ट्रक्चर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक बड़ा कारण है। केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स मिलाकर ईंधन की कीमत काफी बढ़ जाती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर और कम हो जाता है।कुल मिलाकर, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की गिरती कीमतों के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में तुरंत राहत न मिलना सप्लाई चेन, खरीद प्रक्रिया और टैक्स ढांचे का परिणाम है। उपभोक्ताओं को अभी कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ सकता है।





