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क्यों अटका EPFO वेज सिलिंग बढ़ाने का प्रस्ताव?

Ratna Netam
14 July 2026 3:05 PM IST
क्यों अटका EPFO वेज सिलिंग बढ़ाने का प्रस्ताव?
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Business बिजनेस : केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य वेज सिलिंग बढ़ाने के प्रस्ताव को फिलहाल टाल दिया है। प्रस्ताव था कि EPFO की मौजूदा वेतन सीमा को 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जाए। हालांकि, सरकार ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को इसलिए आगे नहीं बढ़ाया गया क्योंकि इससे कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। उद्योग जगत पहले से ही नए लेबर कोड लागू होने के कारण बढ़ते खर्चों का सामना कर रहा है। सरकार फिलहाल कंपनियों पर और अधिक आर्थिक दबाव नहीं डालना चाहती।

जानकारी के अनुसार, सरकार का मानना है कि वेतन सीमा में बढ़ोतरी जरूरी है, लेकिन इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। कर्मचारियों, नियोक्ताओं और उद्योग संगठनों की राय लेने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

उद्योगों पर बढ़ रहा है अतिरिक्त खर्च

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि नए सोशल सिक्योरिटी कोड और वेज कोड के प्रावधानों के कारण कंपनियों की वैधानिक देनदारियां पहले ही बढ़ चुकी हैं। कई कंपनियों को कर्मचारियों से जुड़े नियमों का पालन करने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।

खासकर आईटी सेक्टर में नए श्रम कानूनों के अनुपालन के लिए बड़ी रकम खर्च होने की बात सामने आई है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि ऐसे समय में EPFO वेज सिलिंग बढ़ाने से कंपनियों की लागत और बढ़ सकती है।

क्या है EPFO की मौजूदा वेतन सीमा?

वर्तमान में EPFO के तहत अनिवार्य योगदान के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय है। यह सीमा साल 2014 से नहीं बदली गई है। यानी जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये या उससे कम है, उनके लिए EPFO में योगदान करना अनिवार्य होता है।

वहीं, 15,000 रुपये से ज्यादा बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए EPF और EPS में योगदान के नियम अलग हैं। ऐसे कर्मचारियों के पास कई मामलों में EPF योगदान से बाहर रहने का विकल्प होता है। साथ ही नियोक्ताओं के लिए भी सभी ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को EPFO में शामिल करना अनिवार्य नहीं है।

EPF में कितना होता है योगदान?

मौजूदा नियमों के अनुसार, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12-12 प्रतिशत EPF खाते में जमा करते हैं।

कर्मचारी का पूरा 12 प्रतिशत योगदान EPF खाते में जाता है। वहीं, नियोक्ता के 12 प्रतिशत योगदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में और 3.67 प्रतिशत EPF खाते में जमा होता है।

क्योंकि वर्तमान वेतन सीमा 15,000 रुपये है, इसलिए इस सीमा तक अधिकतम 1,800 रुपये प्रति माह तक का योगदान अनिवार्य होता है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का हिस्सा शामिल होता है।

कर्मचारियों को बढ़ोतरी का इंतजार

EPFO वेज सिलिंग बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। कर्मचारियों का मानना है कि मौजूदा सीमा काफी पुरानी हो चुकी है और इसे मौजूदा वेतन स्तरों के हिसाब से बढ़ाया जाना चाहिए।

अगर भविष्य में सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो ज्यादा संख्या में कर्मचारी EPFO के दायरे में आ सकते हैं और उनके रिटायरमेंट फंड में बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल सरकार इस मामले में सभी पक्षों से बातचीत के बाद आगे बढ़ने की तैयारी में है।

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