
New Delhi नई दिल्ली : सरकारी स्टील कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट का उसके स्टील की कीमतों पर बहुत कम असर पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि वह कच्चे माल की सप्लाई को बिना बाधा जारी रखने के लिए वैकल्पिक शिपिंग मार्ग तैयार कर रही है।
कंपनी के नए चेयरमैन अशोक पांडा ने बताया कि SAIL अपने उत्पादन के लिए दुबई जैसे क्षेत्रों से फ्लक्स और लाइमस्टोन जैसे जरूरी कच्चे माल की खरीद करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट के बावजूद सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए व्यवस्था की जा रही है।
अधिकारी ने बताया कि वेस्ट एशिया क्षेत्र में तनाव की वजह से शिपिंग और लॉजिस्टिक लागत पर असर जरूर पड़ेगा। उनके अनुसार, पहले जहां CFR (Cost and Freight) लागत लगभग 23–24 अमेरिकी डॉलर थी, अब यह बढ़कर करीब 35 डॉलर तक पहुंच सकती है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि इस लागत वृद्धि का असर अंतिम स्टील कीमतों पर बहुत सीमित होगा। चेयरमैन के अनुसार, उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले स्टील की कीमत में लगभग 100 से 200 रुपये प्रति टन तक का ही फर्क पड़ने की संभावना है।
SAIL का कहना है कि वह सप्लाई चेन को स्थिर रखने और उत्पादन पर किसी भी बड़े असर से बचने के लिए पहले से ही वैकल्पिक रणनीतियों पर काम कर रही है। इसमें नए शिपिंग रूट्स और सप्लायर नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है।
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखते हुए आयात व्यवस्था को लचीला बनाया जा रहा है ताकि किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर उत्पादन पर न पड़े।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की बड़ी स्टील कंपनियां अपने मजबूत सप्लाई नेटवर्क के कारण बड़े उतार-चढ़ाव से काफी हद तक सुरक्षित रहती हैं।
कुल मिलाकर, SAIL ने संकेत दिया है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ रही हो, लेकिन घरेलू स्टील बाजार में कीमतों पर इसका असर सीमित और नियंत्रित रहेगा।





