
New Delhi नई दिल्ली : भारत में इस समय मॉनसून की स्थिति पिछले सप्ताह की तुलना में कुछ बेहतर होने के बावजूद कुल मिलाकर कमजोर बनी हुई है। इसका असर देश की कृषि और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर बारिश के चलते आने वाले हफ्तों में खाद्य वस्तुओं की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है और कीमतों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है।
एमके ग्लोबल फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ की रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल खाद्य महंगाई नियंत्रण में दिखाई दे रही है, लेकिन कुछ प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक साप्ताहिक खुदरा बदलावों में सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि अंडों की कीमतों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इसी तरह अनाज में 0.5 प्रतिशत और तेल व वसा (oil and fats) में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
हालांकि यह बढ़ोतरी फिलहाल सीमित स्तर पर है, लेकिन सालाना आधार पर कुछ खाद्य श्रेणियों में अधिक दबाव देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार तेल और वसा में 11 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है, जो सबसे अधिक है। इसके बाद अंडों की कीमतों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सब्जियों, दूध और मसालों में 3-3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अनाज में 2 प्रतिशत और दालों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी सालाना आधार पर देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य महंगाई में यह स्थिरता अभी अस्थायी हो सकती है, क्योंकि मॉनसून की स्थिति ही कृषि उत्पादन और आपूर्ति को सीधे प्रभावित करती है। खासकर सब्जियों और अनाज जैसी वस्तुएं मौसम पर काफी निर्भर रहती हैं। यदि बारिश कमजोर रहती है तो उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे बाजार में आपूर्ति कम हो सकती है और कीमतों में तेजी आ सकती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख खाद्य उत्पादन वाले राज्यों में लगातार कमजोर मॉनसून दर्ज किया जा रहा है। ये राज्य देश की कृषि आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और यहां बारिश की कमी सीधे उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इन राज्यों में यदि आने वाले हफ्तों में बारिश की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव सब्जियों, अनाज और दालों की उपलब्धता पर पड़ सकता है। साथ ही भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मौजूदा स्थिरता को लेकर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह स्थिति तभी बनी रह सकती है जब मॉनसून सामान्य स्तर पर लौटे। अन्यथा, मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन बढ़ने की संभावना है। विशेषकर शहरी बाजारों में इसका असर तेजी से दिखाई दे सकता है, जहां आपूर्ति की निर्भरता ग्रामीण उत्पादन पर अधिक होती है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में सरकार और संबंधित एजेंसियों को खाद्य भंडारण और वितरण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी। कमजोर बारिश की स्थिति में यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
वर्तमान स्थिति में हालांकि खाद्य महंगाई बड़े स्तर पर नियंत्रित दिखाई दे रही है, लेकिन कुछ श्रेणियों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता के चलते बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि मॉनसून की कमजोरी और कृषि उत्पादन पर संभावित असर आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई की दिशा तय करेगा। यदि बारिश में सुधार होता है तो स्थिति स्थिर रह सकती है, लेकिन कमजोर मॉनसून की स्थिति जारी रही तो खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।





