
नई दिल्ली। यूरोपीय संघ (ईयू) ने डिजिटल प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन के मामले में दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल पर बड़ी कार्रवाई की है। यूरोपीय आयोग ने गूगल पर कुल 89 करोड़ यूरो यानी करीब 1 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया है। आयोग का आरोप है कि गूगल ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली नीतियां अपनाईं और अपनी सेवाओं को प्राथमिकता देकर अन्य कंपनियों के लिए असमान माहौल बनाया।
यूरोपीय आयोग के अनुसार, गूगल ने अपने सर्च प्लेटफॉर्म पर अपनी ही सेवाओं को अधिक महत्व दिया। इसके अलावा कंपनी के ऐप इकोसिस्टम यानी गूगल प्ले स्टोर से जुड़े नियमों को लेकर भी प्रतिस्पर्धा को सीमित करने के आरोप लगाए गए हैं। आयोग का कहना है कि डिजिटल बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना जरूरी है, ताकि उपभोक्ताओं और अन्य कंपनियों को समान अवसर मिल सके।
ईयू ने गूगल की सर्च से जुड़ी गतिविधियों के लिए 46 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाया है। वहीं, गूगल प्ले स्टोर के नियमों से संबंधित मामले में कंपनी पर 43 करोड़ यूरो की अलग पेनल्टी लगाई गई है। दोनों मामलों में कुल जुर्माने की राशि 89 करोड़ यूरो पहुंच गई है।
यूरोपीय आयोग ने गूगल को अपने नियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव करने का निर्देश भी दिया है। आयोग ने कंपनी को 60 दिनों के भीतर आदेशों का पालन करने के लिए कहा है। यदि गूगल तय समय सीमा के भीतर सुधारात्मक कदम नहीं उठाता है, तो उस पर अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।
आयोग के मुताबिक, नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में गूगल पर उसकी वैश्विक कुल आय का 5 प्रतिशत तक अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है। यह राशि कंपनी के लिए काफी बड़ी हो सकती है, क्योंकि गूगल का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है और उसकी आय अरबों डॉलर में है।
डिजिटल क्षेत्र में बड़ी टेक कंपनियों की बढ़ती ताकत को लेकर यूरोपीय संघ लंबे समय से सख्त रुख अपनाता रहा है। ईयू का कहना है कि बड़ी तकनीकी कंपनियों को बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके लिए यूरोपीय आयोग ने डिजिटल मार्केट से जुड़े कई नियम लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और छोटे कारोबारियों को अवसर देना है।
गूगल पर इससे पहले भी यूरोप में कई बार प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई हो चुकी है। कंपनी पर अलग-अलग मामलों में अरबों यूरो का जुर्माना लगाया जा चुका है। हालांकि, गूगल कई बार इन फैसलों के खिलाफ अपना पक्ष रखते हुए कहता रहा है कि उसकी सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए बेहतर अनुभव उपलब्ध कराती हैं और वह नियमों का पालन करती है।
ताजा कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर गूगल की अगली प्रतिक्रिया पर है। कंपनी को तय समय के भीतर यूरोपीय आयोग के निर्देशों का पालन करना होगा या फिर कानूनी विकल्पों का सहारा लेना होगा। यह मामला वैश्विक टेक कंपनियों के लिए भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।





