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वेदांता की ग्लोबल री-लिस्टिंग पर विचार, अनिल अग्रवाल ने 100 अरब डॉलर के अवसर का जताया अनुमान
Mumbai: वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने पैरेंट कंपनी 'वेदांता रिसोर्सेज' की विदेश में दोबारा लिस्टिंग (relisting) की संभावना का संकेत दिया है और ग्रुप के लिए विकास का एक बड़ा विज़न पेश किया है।
PTI को दिए एक इंटरव्यू में अग्रवाल ने कहा कि दोबारा लिस्टिंग अभी तुरंत की प्राथमिकता नहीं है, लेकिन अगले तीन साल में ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि कंपनी, जो पहले लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड थी और FTSE 100 इंडेक्स का हिस्सा थी, भविष्य में अमेरिका या किसी अन्य ग्लोबल मार्केट में दोबारा लिस्टिंग पर विचार कर सकती है।
उनके अनुसार, ऐसा कदम शेयरधारकों के लिए काफी वैल्यू बना सकता है।
50 अरब डॉलर का रेवेन्यू टारगेट
अग्रवाल ने कहा कि वेदांता रिसोर्सेज अभी सालाना लगभग 23-24 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाती है और समय के साथ इसे बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है।
उन्होंने यह भरोसा भी जताया कि वेदांता के हर मुख्य बिजनेस वर्टिकल में 100 अरब डॉलर का अवसर बनने की क्षमता है, क्योंकि मेटल, मिनरल और एनर्जी की मांग लगातार बढ़ रही है।
अलग हुई कंपनियों की मार्केट में एंट्री
ये बातें उसी दिन सामने आईं जब वेदांता ग्रुप की अलग हुई चार कंपनियों - वेदांता एल्युमीनियम मेटल, वेदांता पावर, वेदांता ऑयल एंड गैस और वेदांता आयरन एंड स्टील - ने स्टॉक मार्केट में एंट्री की।
इस डीमर्जर (अलग होने की प्रक्रिया) को पिछले साल दिसंबर में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने मंज़ूरी दी थी।
मंज़ूर हुई 1:1 डीमर्जर स्कीम के तहत, शेयरधारकों को वेदांता लिमिटेड में रखे हर शेयर के बदले नई कंपनियों में से हर एक का एक-एक शेयर मिलेगा।
कंपनी का मानना है कि इस रीस्ट्रक्चरिंग से कामकाज आसान होगा, सेक्टर पर फोकस करने वाले बिजनेस बनेंगे और ऐसे ग्लोबल इन्वेस्टर्स आकर्षित होंगे जो खास इंडस्ट्रीज़ में सीधे निवेश करना चाहते हैं।
सभी बिजनेस में बड़े विस्तार की योजनाएं
अग्रवाल ने कहा कि वेदांता अपने सभी मुख्य बिजनेस में बड़े विस्तार की योजना बना रही है।
एल्युमीनियम के मामले में, उन्होंने भारत में प्रति व्यक्ति खपत के कम होने (सिर्फ 3 किलो, जबकि ग्लोबल औसत 30-40 किलो है) पर ज़ोर दिया और इसे विकास का एक बड़ा अवसर बताया।
ऑयल और गैस सेक्टर में, कंपनी का लक्ष्य है कि ज़्यादा गहराई में खोज और रिसोर्स डेवलपमेंट के ज़रिए तीन साल के भीतर प्रोडक्शन को बढ़ाकर 5,00,000 बैरल प्रति दिन किया जाए।
वेदांता 15 मिलियन टन स्टील प्रोडक्शन का लक्ष्य भी लेकर चल रही है, जिसमें उसके मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर और रॉ मटीरियल रिसोर्स का सहयोग मिलेगा। आगे की बात करते हुए अग्रवाल ने कहा कि जैसे-जैसे भारत की ऊर्जा ज़रूरतें बढ़ रही हैं, कंपनी की भविष्य की बिजली उत्पादन क्षमता में परमाणु ऊर्जा 20-25 प्रतिशत का योगदान दे सकती है।
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