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ईरान युद्ध और होर्मुज तनाव से अमेरिका में गैस की कीमतों में उछाल, चार साल का उच्चतम स्तर

Kavita2
6 May 2026 9:53 AM IST
ईरान युद्ध और होर्मुज तनाव से अमेरिका में गैस की कीमतों में उछाल, चार साल का उच्चतम स्तर
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Business बिजनेस: अमेरिका में मंगलवार को गैसोलीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां औसत कीमत 4.50 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन से अधिक पहुंच गई। यह पिछले लगभग चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इस वृद्धि का मुख्य कारण ईरान में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाएं बताई जा रही हैं, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाला है।

GasBuddy के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को रेगुलर अनलेडेड गैसोलीन की राष्ट्रीय औसत कीमत 4.51 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई। यह 17 जुलाई 2022 के बाद से सबसे अधिक राष्ट्रीय औसत है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा के कारण आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है।

GasBuddy के प्रमुख पेट्रोलियम विश्लेषक पैट्रिक डेहान ने कहा कि जब तक ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई शांति समझौता नहीं होता, तब तक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में गैसोलीन का भंडार पहले से ही कई वर्षों के मौसमी निम्न स्तर पर है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले गुरुवार से ही पूरे देश में गैसोलीन की कीमतों में 21 सेंट प्रति गैलन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, 28 फरवरी को ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक राष्ट्रीय औसत कीमत में कुल 1.54 डॉलर प्रति गैलन की वृद्धि हो चुकी है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य में आई बाधाओं से पड़ा है, जो दुनिया के तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। यहां उत्पन्न तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में अमेरिकी सेंट्रल कमांड फोर्स ने रविवार को “प्रोजेक्ट फ्रीडम” नामक एक अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में फंसे और प्रभावित वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करना है। यह कदम अप्रैल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी के बाद उठाया गया है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, तो वैश्विक तेल बाजार और अधिक अस्थिर हो सकता है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। अमेरिका सहित कई देशों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिसका असर अब सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई देने लगा है।

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