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UPI ने रचा डिजिटल क्रांति का इतिहास, 9 साल में 13 हजार गुना बढ़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम

Kavita2
24 Aug 2026 5:43 PM IST
UPI ने रचा डिजिटल क्रांति का इतिहास, 9 साल में 13 हजार गुना बढ़ा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम
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नई दिल्ली। भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, UPI का सालाना ट्रांजैक्शन वॉल्यूम वित्त वर्ष 2016-17 में 1.78 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक हो गया है। इस तरह करीब नौ वर्षों में UPI लेनदेन की संख्या में लगभग 13,000 गुना की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।

यह आंकड़ा बताता है कि भारत में डिजिटल भुगतान किस तेजी से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों, ऑनलाइन सेवाओं, बिल भुगतान और व्यक्तिगत लेनदेन तक UPI ने भुगतान के तरीके को काफी हद तक बदल दिया है।

2016 में शुरू हुआ था UPI

UPI को 25 अगस्त 2016 को लॉन्च किया गया था। इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की निगरानी में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने विकसित किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग बैंक खातों के बीच तत्काल और आसान डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना था।

शुरुआत में UPI का इस्तेमाल सीमित स्तर पर हुआ, लेकिन धीरे-धीरे बैंकों, मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल भुगतान सेवाओं के विस्तार के साथ इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।

आज मोबाइल फोन के जरिए कुछ ही सेकंड में एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसा भेजना संभव है। यही सरलता UPI की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है।

करोड़ों से पहुंचा हजारों करोड़ लेनदेन तक

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 में UPI के जरिए केवल 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई।

इस वृद्धि का पैमाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस अवधि में डिजिटल भुगतान केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग मोबाइल आधारित भुगतान का इस्तेमाल करने लगे हैं।

आज सब्जी खरीदने, किराना सामान लेने, चाय-कॉफी का भुगतान करने, टैक्सी या ऑटो का किराया देने और ऑनलाइन खरीदारी तक के लिए UPI का इस्तेमाल किया जा रहा है।

डिजिटल भुगतान बना रोजमर्रा की जरूरत

UPI ने भुगतान प्रक्रिया को काफी आसान बनाया है। पहले छोटे लेनदेन के लिए नकदी पर निर्भरता अधिक थी। बैंक खाते से पैसा भेजने के लिए कई बार बैंकिंग विवरण की जरूरत पड़ती थी। UPI ने इस प्रक्रिया को मोबाइल आधारित और तत्काल बना दिया।

QR कोड के जरिए भुगतान ने भी इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दुकानदार अपने काउंटर पर QR कोड लगाकर ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं। ग्राहक मोबाइल से कोड स्कैन करके कुछ ही सेकंड में भुगतान कर देता है।

इस व्यवस्था ने छोटे व्यापारियों के लिए भी डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्रवेश आसान किया है।

वित्तीय समावेशन को मिला बढ़ावा

वित्त मंत्रालय ने UPI को भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की रीढ़ और वित्तीय समावेशन का प्रमुख माध्यम बताया है। इसका मतलब है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने बैंकिंग सेवाओं से जुड़े लोगों की संख्या और उनके इस्तेमाल के तरीके को भी प्रभावित किया है।

बैंक खाता, मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्शन रखने वाला व्यक्ति अब कहीं से भी डिजिटल भुगतान कर सकता है। इससे औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में लोगों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है।

खास तौर पर छोटे कारोबारियों और ऐसे लोगों के लिए यह सुविधा महत्वपूर्ण साबित हुई है, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था तक पहुंचने में कठिनाई होती थी।

नकदी पर निर्भरता में बदलाव

भारत लंबे समय से नकदी आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में जाना जाता रहा है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों की भुगतान संबंधी आदतों में बदलाव किया है।

UPI ने इस बदलाव को तेज करने में अहम भूमिका निभाई है। अब छोटी रकम के भुगतान के लिए भी लोग डिजिटल विकल्प चुनने लगे हैं। इससे नकदी रखने और खुले पैसे की समस्या जैसी परेशानियां भी कम हुई हैं।

हालांकि, नकदी का इस्तेमाल पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और देश में अलग-अलग भुगतान माध्यम समानांतर रूप से मौजूद हैं।

तकनीक और बैंकिंग का संगम

UPI की सफलता के पीछे बैंकिंग प्रणाली और डिजिटल तकनीक का मजबूत संयोजन माना जाता है। यह अलग-अलग बैंकों और भुगतान एप्लिकेशन को एक साझा इंटरफेस के माध्यम से जोड़ता है।

इससे ग्राहक को किसी एक बैंक या भुगतान प्रणाली तक सीमित रहने की जरूरत नहीं पड़ती। अलग-अलग बैंकों के खाताधारक एक-दूसरे को आसानी से पैसा भेज सकते हैं।

यही इंटरऑपरेबिलिटी UPI को दूसरे कई डिजिटल भुगतान विकल्पों से अलग बनाती है।

छोटे कारोबारियों को भी फायदा

UPI की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण छोटे व्यापारियों में इसका तेजी से स्वीकार किया जाना है। रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों से लेकर छोटे स्टोर और स्थानीय सेवा प्रदाताओं तक डिजिटल भुगतान स्वीकार करने लगे हैं।

इससे व्यापारियों को नकदी संभालने की जरूरत कम हुई है और भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुंच सकता है। ग्राहकों के लिए भी भुगतान का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहता है।

भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ से अधिक सालाना ट्रांजैक्शन का आंकड़ा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है। महज कुछ करोड़ वार्षिक लेनदेन से हजारों करोड़ लेनदेन तक पहुंचना UPI की स्वीकार्यता और विस्तार की बड़ी कहानी है।

UPI की यात्रा यह भी बताती है कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा किस तरह बड़े पैमाने पर लोगों की आर्थिक गतिविधियों को बदल सकता है।

आगे की राह

UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल भुगतान की सुरक्षा, साइबर धोखाधड़ी से बचाव और उपभोक्ताओं में डिजिटल जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण होगा। जैसे-जैसे लेनदेन की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे सुरक्षित डिजिटल भुगतान की जरूरत भी बढ़ती जाएगी।

फिलहाल 24,162 करोड़ से अधिक वार्षिक लेनदेन का आंकड़ा भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। 2016 में शुरू हुआ UPI अब भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का अहम आधार बन चुका है और करीब 13,000 गुना की वृद्धि इसकी तेजी से बढ़ती स्वीकार्यता की गवाही देती है।

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