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Delhi दिल्ली: आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, बुनियादी ढांचा और सस्ते आवास जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। बुधवार को जारी मोतीलाल ओसवाल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच नीति निर्माता विकास प्राथमिकताओं और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की 'इंडिया स्ट्रैटेजी' रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में भले ही बहुत बड़े ऐलान न हों, लेकिन कुछ चुनिंदा फैसले भी शेयर बाजार में अच्छा माहौल बना सकते हैं।
आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार को आर्थिक विकास को बनाए रखने और घाटे को काबू में रखने के बीच सही संतुलन बनाना होगा। इसके साथ ही, दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों से पैदा हो रही चुनौतियों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत के दौरान यह महसूस किया गया कि निवेशक बड़े और भारी फैसलों की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। वित्त मंत्री के सामने कई मुद्दे हैं, इसलिए बजट को लेकर उम्मीदें कम हैं, जिससे अगर कोई अच्छा फैसला होता है तो वह सकारात्मक रूप से चौंकाने वाला हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बजट का असर थोड़ा कम हुआ है, क्योंकि सरकार बजट के अलावा भी कई आर्थिक फैसले लेती रही है। ऐसे में शेयर बाजार अब बजट से उन खास कदमों की उम्मीद कर रहा है, जो कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा दें और निवेशकों का भरोसा मजबूत करें। सरकार लगातार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कोविड के समय वित्तीय घाटा जहां 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर तक पहुंच गया था, वहीं अब इसके वित्त वर्ष 2026 के अंत तक 4.4 प्रतिशत तक आने की संभावना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार आमतौर पर खर्च को नियंत्रण में रखेगी और इस दिशा में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में कर्ज और जीडीपी का नया लक्ष्य तय किया जाएगा और उपभोग अभी पूरी तरह नहीं बढ़ा है, इसलिए थोड़े से अतिरिक्त खर्च की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर सरकार का अतिरिक्त खर्च सही दिशा में हुआ, जैसे उत्पादक पूंजी निवेश या लोगों की खपत बढ़ाने पर, तो इक्विटी मार्केट इसका समर्थन कर सकता है। लेकिन बेकार के प्रशासनिक खर्च या कम असर वाले भुगतान से बचना जरूरी होगा।
वित्त वर्ष 2026 के बजट में सरकार ने मध्यम वर्ग की खपत बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपए की आयकर राहत दी थी, जिसका पूरा असर अभी दिखना बाकी है। इसलिए रिपोर्ट का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 के बजट में खपत बढ़ाने के लिए बहुत सीमित कदम उठाए जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाला बजट पूंजी निवेश पर ज्यादा ध्यान देगा, खासकर उन क्षेत्रों में जो मौजूदा वैश्विक हालात के कारण देश के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
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