व्यापार
कंपनी से मिला सेवरेंस अमाउंट टैक्स फ्री है या नहीं समझें पूरा हिसाब
Ratna Netam
6 Sept 2026 6:11 PM IST

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नई दिल्ली। नौकरी जाने का समय किसी भी कर्मचारी के लिए काफी मुश्किल भरा होता है। अचानक रोजगार खत्म होने पर कई कंपनियां कर्मचारियों को **सेवरेंस पैकेज (Severance Package)** या एग्जिट मुआवजा देती हैं, ताकि उन्हें नई नौकरी मिलने तक आर्थिक सहारा मिल सके। लेकिन बहुत से कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं होती कि कंपनी से मिलने वाली यह रकम टैक्स के दायरे में आती है या नहीं।
कई लोग सोचते हैं कि नौकरी जाने के बाद मिली रकम राहत के रूप में है, इसलिए इस पर टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन आयकर नियमों के अनुसार सेवरेंस पैकेज का टैक्स ट्रीटमेंट इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा किस रूप में दिया गया है।
क्या सेवरेंस पैकेज पर टैक्स लगता है?
आमतौर पर कंपनी से मिलने वाला सेवरेंस पैकेज **वेतन (Salary Income)** का हिस्सा माना जा सकता है। इसे कई मामलों में **‘Profits in lieu of salary’** यानी वेतन के बदले मिलने वाली आय के रूप में टैक्स के दायरे में रखा जाता है।
इसका मतलब है कि अगर आपको नौकरी खत्म होने के बाद कंपनी से एकमुश्त रकम मिलती है तो वह आपकी कुल आय में जुड़ सकती है और आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स लग सकता है।
सेवरेंस पैकेज में कौन-कौन सी रकम शामिल होती है?
कंपनियां अलग-अलग नामों से कर्मचारियों को भुगतान करती हैं। इसमें शामिल हो सकते हैं—
* नौकरी खत्म होने पर मुआवजा
* नोटिस पीरियड का भुगतान
* एक्स-ग्रेशिया राशि
* लंबित वेतन
* बोनस या अन्य बकाया भुगतान
* रिटायरमेंट से जुड़े लाभ
हर भुगतान का टैक्स नियम अलग हो सकता है। इसलिए ऑफर लेटर या सेटलमेंट लेटर में रकम का विवरण समझना जरूरी होता है।
नोटिस पे पर भी लग सकता है टैक्स
अगर कंपनी आपको नोटिस पीरियड पूरा करने की जगह एक साथ पैसा देती है, तो इसे आमतौर पर वेतन के रूप में देखा जाता है।
उदाहरण के लिए अगर आपकी कंपनी ने तीन महीने का नोटिस पे देकर नौकरी समाप्त कर दी, तो यह रकम आपकी सैलरी आय में जुड़ सकती है और उस पर टैक्स देना पड़ सकता है।
रिट्रेंचमेंट मुआवजे में मिल सकती है छूट
कुछ मामलों में कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने पर मिलने वाला **रिट्रेंचमेंट कंपेंसेशन (Retrenchment Compensation)** टैक्स छूट के नियमों के अंतर्गत आ सकता है। इसके लिए आयकर कानून में तय शर्तें और सीमाएं लागू होती हैं।
यानी हर तरह का सेवरेंस पैकेज पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होता। भुगतान की प्रकृति और कर्मचारी की स्थिति के आधार पर टैक्स तय होता है।
VRS और सेवरेंस पैकेज में अंतर
कई बार लोग VRS यानी **Voluntary Retirement Scheme** और सेवरेंस पैकेज को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग होते हैं।
VRS के तहत मिलने वाली राशि के लिए आयकर कानून में अलग नियम हैं। कुछ परिस्थितियों में तय सीमा तक छूट मिल सकती है।
वहीं सामान्य नौकरी खत्म होने पर मिलने वाला सेवरेंस भुगतान अक्सर वेतन से जुड़ी आय के रूप में देखा जाता है।
कंपनी TDS काट सकती है
अगर सेवरेंस राशि टैक्स योग्य है तो कंपनी भुगतान करते समय **TDS (Tax Deducted at Source)** काट सकती है। इसलिए कर्मचारी को मिलने वाली रकम घोषित राशि से कम हो सकती है।
कई बार कर्मचारी सोचते हैं कि कंपनी ने पैसा काट लिया तो उनका टैक्स काम खत्म हो गया, लेकिन ITR दाखिल करते समय पूरी आय दिखाना जरूरी होता है।
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी कर्मचारी की नौकरी चली गई और कंपनी ने उसे—
* सेवरेंस पैकेज: 10 लाख रुपये
* नोटिस पे: 2 लाख रुपये
* बकाया वेतन: 1 लाख रुपये
कुल 13 लाख रुपये दिए।
इस पूरी रकम का टैक्स ट्रीटमेंट अलग-अलग हो सकता है। कुछ हिस्सा टैक्स योग्य हो सकता है और कुछ पर नियमों के अनुसार छूट मिल सकती है।
टैक्स बचाने के लिए क्या करें?
अगर आपको सेवरेंस पैकेज मिला है तो कुछ बातों का ध्यान रखें—
1. सेटलमेंट लेटर ध्यान से पढ़ें
कंपनी ने किस मद में पैसा दिया है, यह समझना जरूरी है।
2. Form 16 जरूर देखें
कंपनी आपकी आय और कटे हुए टैक्स की जानकारी Form 16 में देती है।
3. सभी आय को ITR में दिखाएं
सेवरेंस राशि छिपाने से बाद में टैक्स नोटिस आ सकता है।
4. टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लें
अगर रकम बड़ी है तो सही टैक्स प्लानिंग जरूरी हो सकती है।
नौकरी जाने के बाद आर्थिक योजना जरूरी
सेवरेंस पैकेज मिलने के बाद कई लोग तुरंत खर्च शुरू कर देते हैं, लेकिन नौकरी मिलने में समय लग सकता है। इसलिए इस रकम का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।
* कुछ रकम इमरजेंसी फंड में रखें
* जरूरी खर्चों की योजना बनाएं
* जल्दबाजी में निवेश करने से बचें
* टैक्स देनदारी पहले समझ लें
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