
व्यापार | भारत के शेयर बाजार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में शानदार प्रदर्शन किया है। बीएसई सेंसेक्स ने 3,763.57 अंक या 5.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की, वहीं निफ्टी में 1,192.45 अंक यानी 5.34 प्रतिशत का उछाल आया। इस दौरान बीएसई की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 25,90,546.73 करोड़ रुपये बढ़कर 4,12,87,646.50 करोड़ रुपये (4,820 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है।
अब सवाल ये है कि क्या अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ और FPI (फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट) के निवेश भारत के शेयर बाजार की चाल को प्रभावित करेंगे?
अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और व्यापार नीतियों का भारत के बाजार पर असर पड़ सकता है, खासकर उन कंपनियों पर जो अमेरिका से निर्यात करती हैं। टैरिफ की वजह से भारत के निर्यात पर दबाव बन सकता है, जिससे कुछ कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, भारत का आंतरिक बाजार और घरेलू मांग मजबूत है, जो इसे बाहरी दबाव से कुछ हद तक बचा सकता है।
FPI का निवेश और इसका असर
FPI का निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है। अगर विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में अधिक निवेश करते हैं, तो इससे बाजार को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रम, जैसे अमेरिका की मौद्रिक नीति और वैश्विक व्यापार तनाव, FPI के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत के शेयर बाजार ने जो तेजी दिखाई है, उसमें घरेलू निवेशकों और मजबूत बाजार आधारित नीतियों का योगदान है। ट्रंप टैरिफ और FPI के प्रवाह में बदलाव से बाजार पर असर पड़ सकता है, लेकिन भारत का मजबूत आंतरिक बाजार और बड़े पैमाने पर निवेशकों की भागीदारी इसे एक स्थिर मार्ग पर रख सकती है।





