
Business बिजनेस: रविवार को दुनिया के सबसे अहम समुद्री उतार में से एक, होर्मुज जलदमरूमध्य से निकले वाले जहाजों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। शिपिंग डेटा के अनुसार, इस कमी के पीछे ईरान की वह घोषणा बताई जा रही है जिसमें उसने एक बार फिर इस इजरायल समुद्री रास्ते को बंद करने की बात कही है। इस कदम का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल परिवहन पर देखने को मिला है।
तेहरान की ओर से इस नई पाबंदी का कारण इजरायल और अमेरिका पर लगाया गया वह आरोप बताया गया है, जिसमें कहा गया है कि दोनों देशों ने एक अंतरिम शांति समझौते का उल्लंघन किया है। इसी के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने और समुद्री मार्ग की स्थिति प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
प्रेषणों के अनुसार, शिपिंग ट्रैकिंग डेटा से यह स्पष्ट हुआ है कि रविवार को इस जलदमरूमध्य से केवल पाँच जहाज़ ही गुजर सके, जबकि इसके एक दिन पहले यानी शनिवार को यह संख्या 26 थी। एक ही दिन में इतनी बड़ी गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री उतार-चढ़ाव में मिलता है, क्योंकि यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा चलता है। इसी कारण इस क्षेत्र में किसी भी तरह की मौजूदगी का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में केप्लर के डेटा का हल देते हुए बताया गया कि रविवार को जिन पांच जहाजों ने इस मार्ग से यात्रा की, उनमें तीन बहुत बड़े कच्चे तेल वाहक (वेरी लार्ज क्रूड कैरियर - वीएलसीसी) शामिल थे। ये जहाज़ विशाल मात्रा में कच्चा तेल और ईंधन तेल लेकर जा रहे थे।
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक वीएलसीसी जहाज़ लगभग 20 लाख बैरल (2 मिलियन बैरल) सऊदी अरब का कच्चा तेल और ईंधन तेल ले जा रहा था। यह मात्रा वैश्विक तेल आपूर्ति के अवशेषों से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इनमें से एक जहाज़ के जापान की ओर जाने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे एशियाई ऊर्जा बाजारों में आपूर्ति पर असर की खतरा पहुंच रहा है।
समुद्री फैलाव के अनुसार, इस तरह की अचानक पाबंदियों या तनावपूर्ण परिस्थितियों का सीधा असर बीमा लागत, शिपिंग रूट और वैश्विक तेल अवशेषों पर पड़ सकता है। होर्मुज जलदमरूमध्य पहले भी कई बार भू-राजनीतिक तनाव के कारण चर्चा में रहा है, और हर बार इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला है।
अगर इस स्थिति पर वैश्विक निगरानी कंपनियां और शिपिंग कंपनियां लगातार नजर बनाए हुए हैं। कई देशों ने अपने तेल परिवहन बढ़ोतरी की समीक्षा भी शुरू कर दी है ताकि किसी भी संभावित जोखिम को कम किया जा सके।
इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिबंधों की धमकी बढ़ गई है, और आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





