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बिल्ली के मल से बनती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी!

Saba Naaz
15 July 2026 4:49 PM IST
बिल्ली के मल से बनती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी!
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नई दिल्ली: दुनिया भर में करोड़ों लोग अपने दिन की शुरुआत एक गरमा-गरम कप कॉफी के साथ करते हैं। कॉफी सिर्फ एक पेय पदार्थ नहीं है, बल्कि कई लोगों के लिए यह एक जुनून और उनकी रईसी व लग्जरी लाइफस्टाइल का पैमाना भी है। कॉफी प्रेमी इसके अनोखे स्वाद और बेहतरीन अहसास के लिए बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी कॉफी को तैयार करने के लिए किसी जानवर की पॉटी (मल) का इस्तेमाल किया जाता है? जी हां, यह बिल्कुल सच है। इस बेहद दुर्लभ और लग्जरी कॉफी का नाम है 'कोपी लुवाक' (Kopi Luwak)। हैरानी की बात यह है कि यह कॉफी 'एशियन पाम सिवेट' (Asian Palm Civet) नामक एक विशेष जानवर के मल से तैयार की जाती है, जो दिखने में काफी हद तक बिल्ली जैसा होता है।

अपने इसी अजीबोगरीब और बेहद जटिल निर्माण प्रोसेस (Manufacturing Process) के कारण यह दुनिया की सबसे महंगी और अनोखी कॉफी बन चुकी है। शौकीन लोग इसके एक कप लग्जरी एक्सपीरियंस के लिए अपनी जेब से हजारों रुपये पानी की तरह बहा देते हैं।

कैसे बनाई जाती है यह अनोखी कॉफी?

कोपी लुवाक कॉफी को बनाने की पूरी प्रक्रिया प्रकृति और जीव विज्ञान का एक बेहद दिलचस्प कॉम्बिनेशन है। 'एशियन पाम सिवेट' नाम का यह जानवर जंगलों में रहता है और इसे सबसे बेहतरीन और पकी हुई लाल कॉफी चेरी (कॉफी के फल) खाना बेहद पसंद होता है।

प्राकृतिक चयन और पाचन: सिवेट बिल्ली केवल सबसे अच्छी और मीठी कॉफी चेरी चुनकर खाती है। जब ये चेरी उसके पेट में जाती हैं, तो उसके पाचन तंत्र (Digestive System) में मौजूद विशेष पाचक एंजाइम्स इन बीन्स के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। ये एंजाइम कॉफी बीन्स में मौजूद प्रोटीन को तोड़ देते हैं।

कड़वापन खत्म होना: पाचन की इस अनोखी प्रक्रिया के दौरान कॉफी बीन्स का फरमेंटेशन (किण्वन) होता है, जिससे कॉफी का स्वाभाविक कड़वापन पूरी तरह से खत्म हो जाता है और उसमें एक बेहद स्मूथ व अनोखा फ्लेवर आ जाता है।

मल से बीजों को इकट्ठा करना: सिवेट बिल्ली कॉफी चेरी के गूदे को तो पचा लेती है, लेकिन उसके भीतर की सख्त बीन्स पच नहीं पातीं और मल के जरिए साबुत बाहर निकल जाती हैं। इसके बाद, जंगलों और खेतों से इस मल को इकट्ठा किया जाता है।

सफाई और रोस्टिंग: मल से निकाले गए इन कॉफी बीजों को कई चरणों में बहुत अच्छी तरह से धोया और साफ किया जाता है। इसके बाद इन्हें तेज धूप में सुखाया जाता है और फिर उच्च तापमान पर भूना (Roast) जाता है। इस पूरी गहन प्रक्रिया के बाद यह कॉफी पूरी तरह से हाइजीनिक, बैक्टीरिया-मुक्त और पीने के लिए सुरक्षित हो जाती है।

कीमत उड़ा देगी आपके होश

इस कॉफी की सबसे बड़ी खासियत इसकी सीमित उपलब्धता और इसे तैयार करने में लगने वाली भारी मेहनत है। चूंकि यह कोई फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर बनने वाली चीज नहीं है, इसलिए इसकी कीमत आम इंसान के बजट से कोसों दूर है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोपी लुवाक कॉफी की कीमत लगभग ₹80,000 प्रति किलोग्राम तक जाती है। वहीं, अगर आप किसी बड़े फाइव-स्टार होटल या प्रीमियम कैफे में जाकर इसके एक कप का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आपको एक सिंगल कप कॉफी के लिए ₹3,500 से लेकर ₹6,000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

स्वाद का शौक या जानवरों के प्रति क्रूरता?

हालांकि कोपी लुवाक अपनी रईसी के लिए मशहूर है, लेकिन हाल के वर्षों में यह उद्योग भारी विवादों में भी रहा है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अब कई जगहों पर जंगली सिवेट बिल्लियों को पकड़कर छोटे पिंजरों में कैद कर दिया जाता है और उन्हें जबरन सिर्फ कॉफी चेरी खिलाई जाती है। पशु कल्याण संगठनों ने इस क्रूरता के खिलाफ आवाज उठाई है। इसलिए, यदि कोई इस लग्जरी कॉफी का स्वाद चखना चाहता है, तो विशेषज्ञ हमेशा 'वाइल्ड सोर्स्ड' (जंगल से प्राकृतिक रूप से इकट्ठा की गई) कोपी लुवाक चुनने की सलाह देते हैं, ताकि प्रकृति और इन बेजुबान जानवरों को कोई नुकसान न पहुंचे।

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