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सोशल मीडिया एल्गोरिदम का जाल, कैसे GenZ तक पहुंच रहा है फेक कंटेंट का सैलाब

nidhi
3 Aug 2026 11:49 AM IST
सोशल मीडिया एल्गोरिदम का जाल, कैसे GenZ तक पहुंच रहा है फेक कंटेंट का सैलाब
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लाइक, शेयर और व्यूज की दुनिया में फेक कंटेंट क्यों बनता है ट्रेंडिंग
नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज सिर्फ यूजर्स की पसंद के आधार पर कंटेंट नहीं दिखाते, बल्कि जटिल एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि किस व्यक्ति को कौन-सी पोस्ट, वीडियो या खबर दिखाई जाएगी। खासकर GenZ (जनरेशन Z) के बीच सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल के कारण फेक कंटेंट और भ्रामक जानकारी तेजी से फैलने की चिंता बढ़ी है।
एल्गोरिदम कैसे करता है कंटेंट का चुनाव?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूजर की गतिविधियों को देखकर कंटेंट सुझाते हैं, जैसे:
कौन-सी पोस्ट ज्यादा देर तक देखी गई
किस वीडियो को लाइक या शेयर किया गया
किन विषयों पर बार-बार क्लिक किया गया
किस तरह के कंटेंट पर कमेंट किया गया
इसके आधार पर एल्गोरिदम यूजर की रुचि का अनुमान लगाता है और उसी तरह की और सामग्री दिखाने लगता है।
फेक कंटेंट क्यों तेजी से वायरल होता है?
कई बार झूठी या भ्रामक खबरें ज्यादा तेजी से फैलती हैं क्योंकि उनमें:
सनसनीखेज हेडलाइन होती है
भावनाओं को भड़काने वाली भाषा होती है
डर, गुस्सा या हैरानी पैदा करने वाले दावे होते हैं
ऐसा कंटेंट ज्यादा क्लिक और शेयर हासिल कर सकता है, जिससे एल्गोरिदम उसे और लोगों तक पहुंचा देता है।
GenZ पर क्यों पड़ रहा है ज्यादा असर?
GenZ का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया को खबरों और जानकारी के प्रमुख स्रोत के रूप में इस्तेमाल करता है। छोटे वीडियो, वायरल ट्रेंड और तेज गति से आने वाली पोस्ट के कारण कई बार जानकारी की सत्यता जांचना मुश्किल हो जाता है।
‘इको चैंबर’ का खतरा
एल्गोरिदम अक्सर यूजर को वही कंटेंट दिखाता है जो उसकी पहले की पसंद से मेल खाता है। इससे एक ऐसा डिजिटल माहौल बन सकता है जहां व्यक्ति केवल अपनी सोच से जुड़ी बातें ही देखता है और अलग-अलग विचारों या सही जानकारी तक उसकी पहुंच कम हो सकती है।
फेक कंटेंट से बचने के तरीके
किसी भी वायरल दावे को तुरंत सच न मानें
खबर का स्रोत जरूर जांचें
कई भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी मिलाएं
संदिग्ध पोस्ट को शेयर करने से पहले सोचें
सोशल मीडिया की सेटिंग्स में कंटेंट प्राथमिकताओं को समझें
सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लेटफॉर्म को फेक कंटेंट की पहचान, फैक्ट चेकिंग और पारदर्शी एल्गोरिदम पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं यूजर्स को भी डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की जरूरत है।
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