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महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना में बड़ी कटौती की, 80 लाख महिलाओं

Payal
2 Jun 2026 3:19 PM IST
महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना में बड़ी कटौती की, 80 लाख महिलाओं
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Business बिजनेस : महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना में बड़े पैमाने पर संशोधन किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना से 80 लाख महिलाओं को लभार्थी सूची से हटा दिया गया है। नाम हटने के बाद इन महिलाओं को 1,500 रुपये की मासिक सहायता राशि अब नहीं मिलेगी।

यह योजना 2024 से राज्य में महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक सहायता के लिए चलाई जा रही थी। शुरुआत में इस योजना के तहत 2.46 करोड़ महिलाओं को लभार्थी सूची में शामिल किया गया था और उन्हें आर्थिक सहायता दी जा रही थी। लेकिन हाल ही में किए गए नए आंकलनों और पात्रता जांच के बाद लभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.66 करोड़ रह गई है।

सरकार का कहना है कि इस कटौती का उद्देश्य योजना को उन महिलाओं तक सीमित करना है जो वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर हैं। अधिकारियों ने बताया कि लभार्थी सूची की पुनः समीक्षा की गई और गैर-लाभार्थी महिलाओं के नाम हटाए गए, ताकि योजना की रकम सही लक्षित समूह तक पहुंचे।

हालांकि, इस कदम के बाद कई महिलाओं में असंतोष और चिंता बढ़ गई है। जिन महिलाओं के नाम हटाए गए हैं, उनका कहना है कि उन्हें योजना की मदद पर निर्भर रहना पड़ता था और अब 1,500 रुपये की मासिक सहायता बंद होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। समाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार को इस कदम के साथ-साथ प्रभावित महिलाओं के लिए वैकल्पिक सहायता के विकल्प पर भी ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि लभार्थी सूची में इस तरह की कटौती सामान्य है, लेकिन इसे पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से लागू करना जरूरी है। उनका कहना है कि जब योजना में लाभार्थियों की संख्या में इतनी बड़ी कमी की जाती है, तो इसके प्रभावों का गहन अध्ययन और उचित सूचना प्रसार होना चाहिए।

इस योजना के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता के साथ-साथ अन्य कल्याणकारी सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं। मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनके जीवन स्तर में सुधार करना था। नई कटौती के बाद सरकार का यह दावा है कि शेष 1.66 करोड़ महिलाओं तक योजना की राशि और सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगी।

हालांकि इस कदम ने चर्चा का विषय भी बढ़ा दिया है। विपक्ष और समाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपील की है कि उन्हें इस बदलाव के कारण प्रभावित हुई महिलाओं की संख्या और नाम हटाने के कारणों की स्पष्ट जानकारी दी जाए।

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