
मुंबई Mumbai: सरकार ने माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए एक क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI-2.0) शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य बैंकों/वित्तीय संस्थानों को नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से गारंटी कवर प्रदान करना है। यह गारंटी कवर उन संभावित नुकसानों के खिलाफ दिया जाएगा, जो उन्हें नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी-माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (NBFC-MFIs) और MFIs को दी गई वित्तीय सहायता पर हो सकते हैं। यह वित्तीय सहायता छोटे उधारकर्ताओं को आगे ऋण देने (on-lending) के लिए दी जाती है।
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इस योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
–पात्र उधारकर्ता: मौजूदा या नए छोटे उधारकर्ता, जो RBI द्वारा समय-समय पर निर्धारित माइक्रोफाइनेंस की नियामक परिभाषा के दायरे में आते हैं;
–गारंटी कवरेज: छोटे NBFC-MFIs/MFIs के लिए डिफॉल्ट राशि का 80%, मध्यम आकार के संस्थानों के लिए 75% और बड़े संस्थानों के लिए 70%;
–गारंटी शुल्क: स्वीकृत राशि पर 0.50% प्रति वर्ष (पहले वर्ष के लिए) और उसके बाद बकाया राशि पर; और
–ब्याज दर: MLIs द्वारा NBFC-MFIs या MFIs को दिए गए ऋणों पर ब्याज दर EBLR या MCLR + 2% प्रति वर्ष तक सीमित (capped) रहेगी। छोटे उधारकर्ताओं को आगे ऋण देते समय, ये ऋणदाता ब्याज दर को पिछले 6 महीनों की औसत ऋण दर से 1% कम पर सीमित रखेंगे।
यह योजना MFI क्षेत्र में ऋण प्रवाह को बढ़ाने में मदद करेगी। अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से NBFC-MFIs/MFIs लगभग 36 लाख छोटे उधारकर्ताओं को आगे ऋण (on-lending) दे पाएंगे। माइक्रोफाइनेंस, आर्थिक पिरामिड के सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों तक ऋण पहुंचाकर वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। NBFC-MFIs और MFIs माइक्रोफाइनेंस ऋण व्यवसाय में मुख्य भागीदार हैं।
माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में चल रहे वित्तीय संकट को देखते हुए, बैंकों द्वारा MFIs को ऋण देने की प्रक्रिया में सुस्ती आई है, जिसके कारण छोटे MFIs को ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस योजना का उद्देश्य ऋण देने वाले संस्थानों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करना है कि वे NBFC-MFIs या MFIs को वित्तपोषण (funding) प्रदान करें, ताकि वे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित माइक्रोफाइनेंस की नियामक परिभाषा के दायरे में आने वाले छोटे उधारकर्ताओं को ऋण दे सकें।





