
नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की कहानी कई दशकों पुरानी है। आज जिस सरकारी कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) बनाने के लिए जाना जाता है, उसी कंपनी ने कभी भारत का पहला स्वदेशी सॉलिड-स्टेट टेलीविजन भी तैयार किया था। यह उपलब्धि देश के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई की दूरदर्शी सोच और नेतृत्व से जुड़ी हुई है।
ECIL की स्थापना 11 अप्रैल 1967 को हैदराबाद में की गई थी। इस कंपनी के संस्थापक मैनेजिंग डायरेक्टर एएस राव थे, जबकि इसके चेयरमैन पद की जिम्मेदारी प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई ने संभाली थी। उस दौर में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उपकरणों के लिए काफी हद तक विदेशी कंपनियों पर निर्भर था। ऐसे समय में ECIL का उद्देश्य देश को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था।
कंपनी की शुरुआत ही इस सोच के साथ हुई थी कि भारत अपनी जरूरतों के लिए आधुनिक तकनीक खुद विकसित करे। शुरुआती वर्षों में ECIL ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण किया। इनमें डिजिटल कंप्यूटर और भारत का पहला स्वदेशी सॉलिड-स्टेट टेलीविजन भी शामिल था।
ECIL द्वारा तैयार किया गया EC-TV भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। उस समय बाजार में मौजूद ज्यादातर टीवी वैक्यूम ट्यूब तकनीक पर आधारित होते थे। ये टीवी ज्यादा बिजली खपत करते थे, जल्दी गर्म हो जाते थे और इनमें खराबी आने की संभावना भी अधिक रहती थी।
इसके विपरीत ECIL का सॉलिड-स्टेट टीवी आधुनिक तकनीक पर आधारित था। इसमें बिजली की खपत कम होती थी, गर्म होने की समस्या कम थी और तस्वीर व आवाज की गुणवत्ता भी बेहतर थी। यह भारत के लिए इसलिए खास था क्योंकि पहली बार देश में बड़े स्तर पर स्वदेशी तकनीक से टीवी निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया गया था।
1975-76 के दौरान भारत सरकार के सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट (SITE) प्रोजेक्ट में भी ECIL ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस परियोजना के तहत कंपनी ने 2,500 से अधिक विशेष टीवी सेट तैयार किए, जो सीधे सैटेलाइट सिग्नल प्राप्त कर सकते थे। इन टीवी के माध्यम से देश के दूरदराज ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा और सूचना पहुंचाने का प्रयास किया गया।
हालांकि समय के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में बड़ा बदलाव आया। 1980 के दशक के बाद विदेशी कंपनियों और निजी क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव के कारण घरेलू टीवी और कंप्यूटर बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई। ECIL को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बाद कंपनी ने उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र से धीरे-धीरे दूरी बनानी शुरू की और रणनीतिक क्षेत्रों पर अपना ध्यान केंद्रित किया।
इसके बाद ECIL ने परमाणु ऊर्जा, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, सुरक्षा प्रणालियों और चुनावी तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करना शुरू किया। आज यह कंपनी भारत की चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है।
ECIL द्वारा बनाई जाने वाली EVM देश की चुनाव व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कंपनी लगातार आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों के साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण कर रही है। हालांकि आज ECIL की पहचान मुख्य रूप से EVM निर्माता के रूप में होती है, लेकिन इसकी शुरुआत भारत के पहले स्वदेशी टीवी बनाने वाली कंपनी के रूप में हुई थी।
डॉ. विक्रम साराभाई का सपना था कि भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। ECIL की कहानी इसी सोच को दर्शाती है। एक ऐसी कंपनी जिसने कभी भारतीय घरों तक स्वदेशी टीवी पहुंचाने का काम किया और आज देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को तकनीकी मजबूती देने में योगदान दे रही है।
ECIL का सफर भारत के तकनीकी विकास की एक प्रेरणादायक कहानी है, जो दिखाता है कि सही दृष्टिकोण और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ देश अपनी तकनीकी जरूरतों को खुद पूरा करने की क्षमता रखता है।





