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केंद्र का बड़ा कदम ईंधन निर्यात पर टैक्स घटा

Ratna Netam
16 Aug 2026 7:19 PM IST
केंद्र का बड़ा कदम ईंधन निर्यात पर टैक्स घटा
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर यानी विंडफॉल टैक्स में बड़ी कटौती की है। वित्त मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को भी घटाया गया है। नई दरें 14 अगस्त से प्रभावी मानी गई हैं।
सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 3.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है। इसका अर्थ है कि अगले संशोधन तक पेट्रोल का निर्यात करने वाली कंपनियों को इस मद में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं चुकाना होगा। इस फैसले से रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी बड़ी ईंधन निर्यातक कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क की दर 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इस तरह डीजल निर्यातकों को प्रति लीटर 1.5 रुपये की राहत मिली है। विमान ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 22 रुपये से घटाकर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ निर्यात पर प्रति लीटर 2.5 रुपये की कटौती की गई है।
नई दरों से केवल निर्यात होने वाले ईंधन पर टैक्स का बोझ घटेगा। घरेलू बाजार में बिक्री के लिए निकाले जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए सरकार के इस फैसले से पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल कटौती होने की उम्मीद नहीं है। घरेलू ईंधन के दाम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, केंद्रीय तथा राज्य कर और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य नीति पर निर्भर करते हैं।
भारत में विंडफॉल टैक्स पहली बार जुलाई 2022 में लगाया गया था। उस समय रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भाव तेजी से बढ़े थे। निजी रिफाइनरी कंपनियों को ईंधन निर्यात से असाधारण मुनाफा हो रहा था। सरकार ने इस मुनाफे का एक हिस्सा कर के रूप में लेने और घरेलू बाजार में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध रखने के लिए निर्यात शुल्क लागू किया था।
इस व्यवस्था को दिसंबर 2024 में समाप्त कर दिया गया था, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने के बाद मार्च 2026 में इसे दोबारा लागू किया गया। सरकार ने 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल निर्यात को भी इसके दायरे में लाया गया।
इससे पहले 3 अगस्त को सरकार ने पेट्रोल निर्यात शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। डीजल पर कुल शुल्क 15.5 रुपये से बढ़ाकर 25.5 रुपये और एटीएफ पर शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर किया गया था। अब वैश्विक बाजार की परिस्थितियों में बदलाव को देखते हुए इन दरों में राहत दी गई है।
सरकार आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों के आधार पर प्रत्येक पखवाड़े निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है। कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनरी मार्जिन में तेजी आने पर शुल्क बढ़ाया जा सकता है, जबकि कीमतों में नरमी आने पर इसे घटाया जाता है। इसलिए मौजूदा दरें स्थायी नहीं हैं और अगली समीक्षा में इनमें फिर बदलाव हो सकता है।
निर्यात शुल्क लगाने का एक प्रमुख उद्देश्य देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। अधिक अंतरराष्ट्रीय कीमतों की स्थिति में रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दे सकती हैं। टैक्स के माध्यम से निर्यात को महंगा बनाकर सरकार कंपनियों को घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करती है। मौजूदा कटौती से संकेत मिलता है कि सरकार ने निर्यातकों की लागत और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
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