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Hyderabad हैदराबाद: राज्य सरकार ने ट्रैफिक मैनेजमेंट, नियम लागू करने, हाईवे पर पेट्रोलिंग और सड़क दुर्घटनाओं की जांच को एक ही सिस्टम के तहत लाने के लिए राज्य पुलिस की एक खास शाखा के तौर पर 'तेलंगाना ट्रैफिक मैनेजमेंट, रोड एंड रेल सेफ्टी ब्यूरो' (TG-TMARS) बनाने का आदेश दिया है। सरकार ने इस बारे में गुरुवार को G.O.Ms.No.135 जारी किया। आदेश में कहा गया है कि कमिश्नरेट और जिलों में मौजूद ट्रैफिक विंग्स में स्टैंडर्ड, टेक्नोलॉजी, ट्रेनिंग, एनालिटिक्स और रिव्यू के लिए कोई एक कॉमन कमांड नहीं थी।
हैदराबाद में हेडक्वार्टर और पूरे तेलंगाना में अधिकार क्षेत्र वाले TG-TMARS के प्रमुख 'डायरेक्टर' के पद पर तैनात एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस या इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस रैंक के अधिकारी होंगे। यह ब्यूरो DGP के प्रशासनिक और अनुशासनात्मक नियंत्रण में काम करेगा और साथ ही राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के फैसलों को लागू करेगा।
नए ब्यूरो की दो मुख्य शाखाएं होंगी — ट्रैफिक और सड़क व रेल सुरक्षा। इसकी जिम्मेदारियों में पूरे राज्य में ट्रैफिक मैनेजमेंट, इलेक्ट्रॉनिक और फिजिकल तरीके से नियम लागू करना, ट्रैफिक कंट्रोल रूम चलाना, हाईवे पर पेट्रोलिंग, सड़क दुर्घटनाओं की जांच, नियम लागू करने से जुड़े एनालिटिक्स और कानूनी कार्रवाई की निगरानी शामिल होगी। यह राज्य में मेट्रो रेल, हाई-स्पीड रेल और अन्य रेल परिवहन में यात्रा की सुरक्षा से जुड़ी पुलिसिंग की भी निगरानी करेगा।
इसका एक अहम हिस्सा सड़क दुर्घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करना होगा। हर पुलिस स्टेशन (ट्रैफिक और लॉ एंड ऑर्डर दोनों) में एक 'रोड क्रैश रिस्पॉन्स ऑफिसर' तैनात किया जाएगा, जो चौबीसों घंटे कार्रवाई करेगा, दुर्घटना वाली जगह को सुरक्षित करेगा, घायलों को 'गोल्डन आवर' के दौरान अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगा और तुरंत eDAR प्लेटफॉर्म पर दुर्घटना की जानकारी दर्ज करेगा।
ब्यूरो एक 'स्टेट ट्रैफिक कंट्रोल रूम' भी चलाएगा और रियल-टाइम निगरानी के लिए यूनिट-लेवल के कंट्रोल रूम और इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट डिवाइस को आपस में जोड़ेगा। यह ई-चालान सिस्टम और शराब पीकर गाड़ी चलाने, हेलमेट और सीट-बेल्ट न लगाने, गलत साइड गाड़ी चलाने, लेन के नियमों को तोड़ने, तेज़ रफ़्तार और ओवरलोडिंग जैसे अपराधों के खिलाफ कार्रवाई की निगरानी करेगा।
हाईवे के लिए, नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे, आउटर रिंग रोड और नोटिफाइड स्टेट हाईवे पर खास पेट्रोल यूनिट तैनात की जाएंगी। इसके अलावा, जिन पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में 50 किलोमीटर से ज़्यादा नेशनल या स्टेट हाईवे आते हैं, वहाँ एक हाईवे पेट्रोल यूनिट होगी। इस यूनिट में एक हेड कॉन्स्टेबल, एक पुलिस कॉन्स्टेबल और पेट्रोलिंग के लिए एक खास गाड़ी होगी। इन यूनिट्स में डैशबोर्ड कैमरे, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचानने वाले सिस्टम और स्पीड मापने वाले डिवाइस लगे होंगे।
इस आदेश में 'ट्रैफिक मैनेजमेंट फंड' बनाने की भी बात कही गई है। मोटर व्हीकल एक्ट और नियमों के तहत पुलिस द्वारा वसूले गए कंपाउंडिंग शुल्क और जुर्माने का 40 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में जमा किया जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट इक्विपमेंट, पेट्रोलिंग गाड़ियों, ट्रैफिक कंट्रोल रूम, टेक्नोलॉजी, सड़क से जुड़े इमरजेंसी कामों, ट्रेनिंग और सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य उपायों के लिए किया जाएगा। संगठन के विस्तार के तहत, हर पुलिस कमिश्नरेट में 'जॉइंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ट्रैफिक)' और हर ज़िले में 'एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (ट्रैफिक)' का पद बनाया जाएगा। सरकार ने DGP को यह भी निर्देश दिया है कि वे पुलिस की दूसरी शाखाओं से 300 पद और उनके कर्मचारियों को TG-TMARS में ट्रांसफर करें।
मौजूदा ट्रैफिक विंग, ट्रैफिक पुलिस स्टेशन और ई-चालान का काम-काज आदेश की तारीख से ही इस ब्यूरो की देखरेख में आ जाएगा। TG-TMARS के डायरेक्टर को विस्तृत 'स्टैंडिंग ऑर्डर' और 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' जारी करने और छह महीने के भीतर ब्यूरो के कामकाज शुरू होने के बारे में 'स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल' को रिपोर्ट देने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
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