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टाटा ट्रस्ट बोर्ड में तनातनी: बोर्ड प्रस्तावों से छेड़छाड़ का आरोप

Tara Tandi
6 Oct 2026 1:12 PM IST
टाटा ट्रस्ट बोर्ड में तनातनी: बोर्ड प्रस्तावों से छेड़छाड़ का आरोप
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नई दिल्ली: एक रिपोर्ट के अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सीनियर ट्रस्टियों ने अपने साथी ट्रस्टियों वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की लिस्टिंग का सार्वजनिक रूप से समर्थन करके बोर्ड के फैसलों को कमजोर किया है और अपनी भरोसे की जिम्मेदारी (fiduciary duties) का उल्लंघन किया है।
NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, SDTT ट्रस्टियों - नोएल एन टाटा, डेरियस जे. खंबाटा, नेविल एन टाटा और भास्कर भट - के हस्ताक्षर वाले इस पत्र से टाटा संस के भविष्य के मालिकाना हक और लिस्टिंग स्टेटस को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के अंदरूनी मतभेद और बढ़ गए हैं।
ट्रस्टियों का कहना है कि टाटा संस को अनलिस्टेड (शेयर बाजार में लिस्ट न कराना) रखना ट्रस्ट और कंपनी का सालों से तय रुख रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस बोर्ड ने मार्च 2024 में सर्वसम्मति से कंपनी के अनलिस्टेड स्टेटस को बनाए रखने का फैसला किया था, जबकि SDTT और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने जुलाई 2025 में सर्वसम्मति से इस रुख को दोहराया और इस मामले पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ बातचीत करने पर सहमति जताई थी।
इसके अलावा, ट्रस्टियों ने कहा कि जुलाई 2025 के फैसलों को रद्द नहीं किया गया था और उन्होंने श्रीनिवासन और सिंह की आलोचना की कि उन्होंने उन फैसलों पर पुनर्विचार करने या संभावित लिस्टिंग पर अपनी बदली हुई राय को सामूहिक चर्चा के लिए ट्रस्टियों के सामने नहीं रखा।
लिस्टिंग का समर्थन करने वाले उनके सार्वजनिक बयानों ने ट्रस्ट के फैसलों को कमजोर किया और RBI के पास टाटा संस की लंबित अर्जी पर भी असर डाल सकते हैं।
ट्रस्टियों ने 28 सितंबर के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया जिसमें टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने की बात कही गई थी। यह कंपनी को RBI के नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) के लिए तय मुख्य बिजनेस मानदंडों से बचने और साथ ही अपना अनलिस्टेड स्टेटस बनाए रखने में मदद करने का एक संभावित तरीका हो सकता है।
रिपोर्ट से पता चला है कि टाटा संस बोर्ड ने ट्रस्ट से कहा था कि वे RBI के निर्देशों का पालन करने के लिए केवल लिस्टिंग ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करें।
ट्रस्टियों ने पत्र में कहा, "टाटा ट्रस्ट्स ने वही किया जो टाटा संस के बोर्ड ने उनसे कहा था," और पब्लिक लिस्टिंग के अलावा दूसरे विकल्प खोजने की अपनी कोशिशों का बचाव किया।
ये घटनाक्रम ट्रस्टियों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करते हैं कि क्या टाटा संस को अनलिस्टेड रहना चाहिए या RBI की रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ना चाहिए।
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