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मीटिंग में चाय का फरमान, 163 साल पुरानी कंपनी को फायदा

Saba Naaz
27 July 2026 3:00 PM IST
मीटिंग में चाय का फरमान, 163 साल पुरानी कंपनी को फायदा
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के एक निर्देश के बाद 163 साल पुरानी चाय कंपनी एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड (AYCL) के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों को आधिकारिक बैठकों, सम्मेलनों, कैंटीन और सरकारी कार्यक्रमों में 'यूल टी' का इस्तेमाल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद सोमवार को कंपनी के शेयर में इंट्रा-डे कारोबार के दौरान करीब 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

एंड्रयू यूल एक सरकारी कंपनी है, जो भारी उद्योग मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम (CPSE) है। कंपनी की स्थापना वर्ष 1863 में हुई थी और यह देश की सबसे पुरानी चाय उत्पादक कंपनियों में शामिल है। कंपनी असम और पश्चिम बंगाल में अपने चाय बागानों का संचालन करती है और 'यूल टी' ब्रांड के तहत कई प्रकार की चाय बाजार में उपलब्ध कराती है।

सरकारी निर्देश जारी होने के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर एंड्रयू यूल के शेयर में तेजी आई। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 19.65 प्रतिशत बढ़कर 30.50 रुपये प्रति शेयर के इंट्रा-डे हाई स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली किए जाने के कारण इसमें थोड़ी गिरावट आई और दोपहर करीब ढाई बजे यह लगभग 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 30.09 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था।

केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी मंत्रालय और विभाग अपनी आधिकारिक बैठकों, सम्मेलनों, सरकारी कार्यक्रमों और कैंटीन में 'यूल टी' के उपयोग को बढ़ावा दें। मंत्रालय का उद्देश्य सरकारी कंपनी के उत्पादों को बढ़ावा देना और घरेलू स्तर पर निर्मित चाय को प्रोत्साहित करना है।

'यूल टी' एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड का प्रमुख चाय ब्रांड है। कंपनी ऑर्थोडॉक्स टी, सीटीसी टी, ग्रीन टी और फ्लेवर्ड टी जैसी कई किस्मों का उत्पादन करती है। इसके अलावा कंपनी दार्जिलिंग, डुआर्स और असम की प्रसिद्ध चाय किस्मों को भी बाजार में उपलब्ध कराती है।

मंत्रालय ने बताया कि एंड्रयू यूल देश के पुराने और प्रतिष्ठित चाय उत्पादकों में से एक है। कंपनी के उत्पादों को ग्राहकों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी को वित्तीय चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है। इसी को देखते हुए कंपनी के उत्पादों को अधिक से अधिक बढ़ावा देने की पहल की जा रही है।

एंड्रयू यूल की चाय संसद और कई सरकारी संस्थानों में भी पहले से उपलब्ध कराई जाती रही है। कंपनी के उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी खरीदे जा सकते हैं। सरकारी स्तर पर प्रचार मिलने के बाद कंपनी को नए बाजार और ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, उद्योग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने भी पहले एंड्रयू यूल के 'यूल टी' ब्रांड के प्रचार और उपयोग को बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद भारी उद्योग मंत्रालय ने मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय कर इस दिशा में कदम उठाया है।

शेयर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी समर्थन से कंपनी की बिक्री और ब्रांड पहचान को फायदा मिल सकता है। हालांकि शेयर बाजार में किसी भी कंपनी के प्रदर्शन पर कई अन्य आर्थिक और कारोबारी कारकों का असर पड़ता है। निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ सलाह जरूर लेनी चाहिए।

एंड्रयू यूल की कहानी भारत के औद्योगिक इतिहास से भी जुड़ी हुई है। 1863 में शुरू हुई यह कंपनी समय के साथ चाय उत्पादन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में सफल रही। अब सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में 'यूल टी' को बढ़ावा मिलने से कंपनी के कारोबार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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