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GeM से तीन साल में टैक्सपेयर्स के 86,571 करोड़ रुपये बचे: पीयूष गोयल

Kavita2
11 Aug 2026 10:24 AM IST
GeM से तीन साल में टैक्सपेयर्स के 86,571 करोड़ रुपये बचे: पीयूष गोयल
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नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने सार्वजनिक खरीद में कीमत और प्रक्रिया की दक्षता बढ़ाकर पिछले तीन वित्त वर्षों में करदाताओं के 86,571 करोड़ रुपये बचाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि GeM के जरिए सरकारी विभागों और संस्थानों द्वारा की जाने वाली खरीद में पारदर्शिता बढ़ी है और प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिला है।

गोयल GeM के 10वें फाउंडेशन डे कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने सरकारी खरीद व्यवस्था में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका और सार्वजनिक धन के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि GeM ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ कीमतों में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है।

तीन साल में 86,571 करोड़ की बचत

वाणिज्य मंत्री के मुताबिक, GeM ने वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच तीन वर्षों में सार्वजनिक खरीद के दौरान कुल 86,571 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत में योगदान दिया। यह बचत मुख्य रूप से बेहतर कीमतों और खरीद प्रक्रिया में दक्षता के चलते हुई।

सरकारी खरीद में बड़ी मात्रा में सार्वजनिक धन खर्च होता है। ऐसे में यदि सामान और सेवाओं की खरीद प्रतिस्पर्धी कीमत पर की जाए और प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए, तो सरकार के खर्च में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। GeM इसी मॉडल के तहत सरकारी खरीदारों और विक्रेताओं को एक डिजिटल मंच उपलब्ध कराता है।

गोयल ने कहा कि इस तरह की बचत का सीधा फायदा करदाताओं को मिलता है, क्योंकि सरकारी खर्च में कमी का मतलब सार्वजनिक संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग है।

IIT दिल्ली की स्टडी का हवाला

गोयल ने अपने संबोधन में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली की एक स्टडी का भी उल्लेख किया। इस अध्ययन में GeM पर उपलब्ध कीमतों की तुलना अन्य वाणिज्यिक ई-मार्केटप्लेस पर उपलब्ध कीमतों से की गई।

अध्ययन में 101 वस्तुओं की तुलना की गई। इसके मुताबिक, 74.3 प्रतिशत वस्तुओं के मामले में GeM पर कीमतें दूसरे ई-मार्केटप्लेस की तुलना में कम पाई गईं। अध्ययन में खर्च-वेटेड बचत 13.6 प्रतिशत बताई गई।

इसका मतलब है कि समान या तुलनीय वस्तुओं की खरीद में सरकारी खरीदारों को GeM पर प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिला। सरकार के लिए यह आंकड़ा महत्वपूर्ण है, क्योंकि सार्वजनिक खरीद का बड़ा हिस्सा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर खर्च होता है।

डिजिटल खरीद से पारदर्शिता बढ़ी

GeM की शुरुआत सरकारी खरीद प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके जरिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी संस्थान एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वस्तुओं और सेवाओं की खरीद कर सकते हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म होने के कारण खरीद प्रक्रिया में कागजी कार्यवाही कम होती है और खरीदारों के लिए विभिन्न विक्रेताओं तथा उनके उत्पादों की तुलना करना आसान होता है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना रहती है और सरकारी संस्थानों को बेहतर कीमत पर खरीद का अवसर मिलता है।

गोयल ने GeM की उपलब्धियों को सार्वजनिक खरीद व्यवस्था में डिजिटल बदलाव का उदाहरण बताया।

छोटे कारोबारियों और विक्रेताओं को मंच

GeM के जरिए बड़ी कंपनियों के साथ छोटे और मध्यम विक्रेताओं को भी सरकारी खरीद बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से विक्रेता विभिन्न सरकारी खरीदारों तक अपने उत्पाद और सेवाएं पहुंचा सकते हैं।

सरकार लंबे समय से सार्वजनिक खरीद में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSMEs की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देती रही है। GeM इस दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।

सरकारी संस्थानों की खरीद आवश्यकताओं और विभिन्न विक्रेताओं की उपलब्धता को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने से खरीद प्रक्रिया में अधिक प्रतिस्पर्धा पैदा करने की कोशिश की गई है।

कीमत के साथ प्रक्रिया की दक्षता भी अहम

पीयूष गोयल ने केवल कम कीमतों को ही GeM की उपलब्धि नहीं बताया, बल्कि प्रक्रिया की दक्षता को भी महत्वपूर्ण बताया। सार्वजनिक खरीद में किसी वस्तु को कम कीमत पर खरीदना तभी प्रभावी माना जाता है जब पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो।

ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए खरीद की जरूरत दर्ज करने से लेकर विक्रेता का चयन और ऑर्डर तक की प्रक्रिया डिजिटल रूप से पूरी की जा सकती है। इससे खरीद प्रक्रिया में समय और प्रशासनिक संसाधनों की बचत हो सकती है।

मंत्री ने इसी वजह से GeM की भूमिका को सार्वजनिक खरीद में कीमत और प्रक्रिया दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बताया।

10वें फाउंडेशन डे पर उपलब्धियों का उल्लेख

GeM के 10वें फाउंडेशन डे कार्यक्रम में मंत्री ने प्लेटफॉर्म की अब तक की यात्रा और सार्वजनिक खरीद में इसके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम से सरकारी खरीद को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में GeM ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में सार्वजनिक खरीद को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। सरकारी खरीद में बेहतर कीमत, अधिक प्रतिस्पर्धा और प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्राथमिकता देने पर जोर जारी रहेगा।

सार्वजनिक धन के बेहतर इस्तेमाल की कोशिश

सरकारी खरीद में होने वाली बचत को सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से जोड़कर देखा जाता है। यदि सरकारी विभाग समान गुणवत्ता की वस्तु कम कीमत पर खरीदते हैं, तो बची हुई राशि का इस्तेमाल अन्य विकास कार्यों और सार्वजनिक सेवाओं में किया जा सकता है।

ऐसे में GeM से तीन वर्षों में 86,571 करोड़ रुपये की बचत का दावा सरकार की डिजिटल खरीद व्यवस्था के आर्थिक प्रभाव को दर्शाता है।

IIT दिल्ली की स्टडी में 101 वस्तुओं में से 74.3 प्रतिशत के लिए GeM पर कम कीमत मिलने और 13.6 प्रतिशत खर्च-वेटेड बचत का आंकड़ा भी इस दावे को समर्थन देता है।

कुल मिलाकर, GeM का विस्तार सार्वजनिक खरीद को डिजिटल, प्रतिस्पर्धी और अधिक पारदर्शी बनाने की सरकार की कोशिश का हिस्सा है। आने वाले वर्षों में प्लेटफॉर्म पर अधिक खरीदारों और विक्रेताओं की भागीदारी बढ़ने के साथ सरकारी खरीद में लागत और प्रक्रिया की दक्षता को और बेहतर करने की उम्मीद की जा रही है।

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