
Vyapaar:इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) समय पर फाइल कर देना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, क्योंकि आयकर विभाग (CBDT) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्क्रूटनी के नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत कुछ विशेष मामलों में ‘कम्पलसरी स्क्रूटनी’ की जाएगी, यानी चयनित फाइलों की गहराई से जांच होगी। विभाग ने 6 सीनारियो कोड (CS01 से CS06) तय किए हैं, जिनके आधार पर टैक्सपेयर्स की फाइलें ऑटोमैटिक जांच के दायरे में आ सकती हैं।
सर्वे वाले मामलों की जांच
अगर 1 अप्रैल 2024 के बाद किसी व्यक्ति या संस्था की प्रॉपर्टी या ऑफिस में धारा 133A के तहत सर्वे हुआ है, तो उसकी ITR फाइल स्क्रूटनी में जा सकती है। हालांकि केवल TDS वेरिफिकेशन वाले सर्वे इसमें शामिल नहीं होंगे।
सर्च और सीजर केस
जिन मामलों में सर्च ऑपरेशन हुआ है या बेहिसाब संपत्ति मिलने का संदेह है, उनकी फाइलें सीधे जांच के दायरे में आ जाएंगी। ऐसे मामलों में विभाग विस्तृत जांच करता है।
पुराने नोटिस वाले केस
धारा 148 के तहत जिन टैक्सपेयर्स को नोटिस जारी हुआ है, यानी जिनकी आय पर पहले से शक है, उनके रिटर्न की पूरी तरह समीक्षा होगी।
ट्रस्ट और संस्थाओं पर नजर
जिन संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन 12A, 12AB या 10(23C) कैंसिल हो चुका है, लेकिन वे फिर भी छूट का दावा कर रही हैं, ऐसे मामलों में कड़ी जांच की जाएगी।
पुराने विवादों का रिकॉर्ड
यदि पिछले वर्षों में टैक्स विवादों में विभाग के पक्ष में बड़ा फैसला हुआ है (मेट्रो शहरों में 50 लाख रुपये से अधिक और अन्य शहरों में 20 लाख रुपये से अधिक), तो ऐसी फाइलें दोबारा जांची जा सकती हैं।
टैक्स चोरी की पुख्ता जानकारी
अगर किसी सरकारी एजेंसी के पास टैक्स चोरी से जुड़ी ठोस जानकारी है, तो बिना गलती के भी स्क्रूटनी संभव है।
विभाग की निगरानी और सलाह
आयकर विभाग अब डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल सिस्टम का उपयोग कर रहा है, जिससे हर वित्तीय लेनदेन पर नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्सपेयर्स को सभी आय स्रोत सही तरीके से दिखाने चाहिए और दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चाहिए। स्क्रूटनी का मतलब हमेशा गलती नहीं होता, लेकिन यह लंबी और विस्तृत प्रक्रिया जरूर हो सकती है।
निष्कर्ष
ITR फाइल करने के बाद भी टैक्सपेयर्स को सतर्क रहने की जरूरत है। सही जानकारी और पारदर्शिता ही भविष्य में किसी भी परेशानी से बचा सकती है।





