
बिज़नेस: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय थोड़ी सी समझदारी टैक्सपेयर्स के हजारों-लाखों रुपये बचा सकती है। फ्रीलांसरों, डॉक्टरों, वकीलों और अन्य पेशेवरों के लिए आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 44ADA टैक्स बचत का एक बेहतरीन और सरल अवसर प्रदान करती है। इस विशेष प्रावधान का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम स्तर के प्रोफेशनल्स को टैक्स फाइलिंग की जटिलताओं और कागजी कार्रवाई से राहत देना है। इसके तहत पात्र पेशेवर अपनी कुल वार्षिक कमाई यानी ग्रॉस रिसीट का केवल 50 प्रतिशत हिस्सा ही अपनी कर योग्य आय (टैक्सेबल इनकम) घोषित कर सकते हैं, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि को सीधे उनके पेशेवर खर्चों के रूप में मान लिया जाता है।
इस धारा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि करदाताओं को अपने दैनिक या पेशेवर खर्चों को साबित करने के लिए कोई अलग-अलग बिल, रसीदें या भारी-भरकम अकाउंट बुक्स (खाते) बनाए रखने की आवश्यकता नहीं होती। मान लीजिए यदि किसी योग्य पेशेवर की एक वित्तीय वर्ष में कुल प्रोफेशनल कमाई 40 लाख रुपये है, तो धारा 44ADA की प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम को चुनने पर उसे केवल 20 लाख रुपये पर ही आयकर की गणना करनी होगी। बाकी के 20 लाख रुपये को विभाग द्वारा स्वयं ही खर्च मान लिया जाता है। इससे न केवल कर योग्य आय में भारी कमी आती है, बल्कि अकाउंट्स ऑडिट और सीए के चक्कर लगाने के झंझट से भी मुक्ति मिल जाती है।
यह सुविधा भारत में रहने वाले (रेजिडेंट) उन पेशेवरों के लिए उपलब्ध है जो आयकर अधिनियम के तहत अधिसूचित विशिष्ट व्यवसायों से जुड़े हैं। इनमें डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए), इंटीरियर डेकोरेटर, आईटी व टेक्निकल कंसलटेंट और कई योग्य फ्रीलांसर शामिल हैं। हालांकि इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुल ग्रॉस रिसीट की एक तय सीमा निर्धारित की गई है। सामान्य परिस्थितियों में वार्षिक टर्नओवर की सीमा 50 लाख रुपये है, लेकिन यदि किसी पेशेवर की कुल प्राप्तियों में से 95 प्रतिशत या उससे अधिक का लेनदेन डिजिटल माध्यमों (बैंक ट्रांसफर, यूपीआई आदि) से हुआ है, तो यह सीमा बढ़ाकर 75 लाख रुपये तक लागू होती है।
धारा 44ADA का चयन करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एडवांस टैक्स (अग्रिम कर) के नियमों को समझना भी अत्यंत आवश्यक है। आम करदाताओं को जहां साल में चार किस्तों में एडवांस टैक्स देना होता है, वहीं धारा 44ADA चुनने वाले प्रोफेशनल्स को पूरे वर्ष का कुल एडवांस टैक्स 15 मार्च तक एक ही किस्त में जमा करना अनिवार्य होता है। यदि इस तिथि तक एडवांस टैक्स का भुगतान नहीं किया जाता, तो आयकर नियमों के अनुसार बकाया राशि पर ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।
जो पेशेवर इस प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं, वे आसानी से ITR-4 (सुगम) फॉर्म के जरिए अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। यह फॉर्म बेहद सरल होता है और इसे भरने में समय भी बहुत कम लगता है। यदि आप भी एक योग्य पेशेवर या फ्रीलांसर हैं, तो ITR दाखिल करते समय इस नियम की अनदेखी करने की गलती न करें और सही जानकारी के साथ धारा 44ADA का लाभ उठाकर अपनी मेहनत की कमाई पर टैक्स बचाएं।





