
Business बिजनेस: भारत के प्रदूषण नियंत्रण रेगुलेटर ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की एक फैक्ट्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो Apple के iPhone के लिए पार्ट्स का निर्माण करती है। आरोप है कि इस फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के खेतों और भूजल को दूषित कर रहा है।
यह मामला तमिलनाडु के होसुर स्थित उस प्लांट से जुड़ा है, जहां iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं। यह फैक्ट्री भारत में Apple की सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा मानी जाती है और चीन के बाहर iPhone उत्पादन बढ़ाने की रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय जमीन मालिकों ने पिछले कई महीनों से तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट पानी उनकी जमीन और खुले कुओं में मिल रहा है, जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कारण कृषि कार्य और पीने के पानी पर भी असर पड़ रहा है।
मामले की जांच के बाद प्रदूषण रेगुलेटर ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि यदि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर से संतोषजनक जवाब और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तो फैक्ट्री को बंद करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में Apple की प्रमुख सप्लायर कंपनियों में से एक है और यह कंपनी चीन के बाहर उत्पादन विस्तार की दिशा में Apple की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में यह कंपनी दक्षिण एशिया में Foxconn के बाद Apple की दूसरी सबसे बड़ी सप्लायर मानी जाती है।
इस आरोप के सामने आने के बाद औद्योगिक गतिविधियों और पर्यावरणीय मानकों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण उद्योग के साथ पर्यावरण सुरक्षा मानकों का पालन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।





