
व्यापार | भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में SUV की जबरदस्त मांग ने टाटा मोटर्स और महिंद्रा की बिक्री को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। मार्च 2024 में इन कंपनियों की बिक्री में 10% तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि मारुति सुजुकी और ह्यूंडई जैसी प्रमुख कंपनियों की बिक्री में 1.5% से 2% तक की गिरावट आई है।
SUV सेगमेंट क्यों बना ग्रोथ इंजन?
बीते कुछ वर्षों में SUV की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। भारतीय ग्राहक अब प्रीमियम, दमदार और फीचर-लोडेड गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियां अपनी SUV लाइनअप पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
महिंद्रा स्कॉर्पियो-N और XUV700 की जबरदस्त मांग बनी हुई है।
टाटा नेक्सन, पंच और हैरियर जैसी गाड़ियों की बिक्री भी लगातार बढ़ रही है।
ग्राहकों को SUV में ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस, मजबूत बॉडी और एडवांस फीचर्स मिलते हैं, जिससे यह सेगमेंट और मजबूत हो रहा है।
मारुति-ह्यूंडई की बिक्री में गिरावट क्यों?
मारुति और ह्यूंडई भारतीय बाजार की दो सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनियां हैं, लेकिन उनकी बिक्री में हाल ही में गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे कुछ अहम कारण हैं:
छोटी कारों की घटती मांग: पहले जहां छोटी कारें और सेडान ज्यादा बिकती थीं, अब ग्राहक SUV सेगमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
SUV पोर्टफोलियो में चुनौती: मारुति और ह्यूंडई की SUV गाड़ियां जैसे ग्रैंड विटारा, ब्रेजा, क्रेटा और वेन्यू मार्केट में मौजूद हैं, लेकिन टाटा और महिंद्रा की गाड़ियों के मुकाबले ग्राहकों को उतनी दिलचस्पी नहीं दिख रही है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा: टाटा और महिंद्रा के अलावा, किआ, एमजी मोटर और टोयोटा भी SUV सेगमेंट में मजबूती से उभर रहे हैं, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई है।
आगे क्या?
SUV सेगमेंट में तेजी को देखते हुए मारुति और ह्यूंडई भी अपनी रणनीति में बदलाव कर रही हैं।
मारुति जल्द ही 5-डोर जिम्नी और नई SUV मॉडल्स लाने की तैयारी में है।
ह्यूंडई भी नई टक्सन और क्रेटा फेसलिफ्ट जैसी गाड़ियों के जरिए SUV बाजार में मजबूती बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
महिंद्रा और टाटा आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक SUV पर फोकस कर सकते हैं, जिससे उनकी बिक्री और बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
SUV की मांग ने भारतीय ऑटो बाजार में बड़ी हलचल मचा दी है। जहां टाटा और महिंद्रा की बिक्री लगातार बढ़ रही है, वहीं मारुति और ह्यूंडई को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत होगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखती है।





