व्यापार

टैरिफ शॉक से 25 बीपीएस रेट कट का संकेत, आरबीआई का रुख हो सकता है ‘अकोमोडेटिव’ : रिपोर्ट

jantaserishta.com
8 April 2025 1:16 PM IST
टैरिफ शॉक से 25 बीपीएस रेट कट का संकेत, आरबीआई का रुख हो सकता है ‘अकोमोडेटिव’ : रिपोर्ट
x
नई दिल्ली: ग्लोबल सेंटीमेंट में तेजी से बदलाव, बाजार में उच्च अस्थिरता और अमेरिकी टैरिफ शॉक के बीच मंदी के डर से संकेत मिलता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 9 अप्रैल को 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। साथ ही बैंक दिशा में सहजता के लिए रुख में बदलाव कर “अकोमोडेटिव” हो सकता है। यह जानकारी मंगलवार को आई एक लेटेस्ट रिपोर्ट में दी गई।
केंद्रीय बैंक ने सोमवार को अपनी तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू की। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने नोट में कहा, "यह वैश्विक व्यापार युद्ध किस हद तक फैल सकता है, यह स्पष्ट नहीं है। इस साल भारत में मौद्रिक नीति को वित्त वर्ष की तुलना में ज्यादा काउंटर-साइक्लिकल होने के कारण भारी काम करना पड़ सकता है। भारत के लिए ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट से जुड़े व्यवधानों और रियल सेक्टर की मार दोनों से प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं।"
हालांकि बातचीत और तनाव कम करने की गुंजाइश है। नोट के अनुसार, "हमें लगता है कि यह आने वाले महीनों में उभरते बाजारों (ईएम) की परिसंपत्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।" हालांकि, वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए आरबीआई जल्द ही सभी इंस्ट्रूमेंट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहेगा और इसलिए अप्रैल में कटौती नहीं कर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "आवश्यक होने पर आसान विनियामक (उधार) मानदंडों के रूप में गैर-पारंपरिक सहजता, बैंकों के लिए 90 प्रतिशत से कम दैनिक सीआरआर रिक्वायरमेंट, स्थिर भारतीय मुद्रा प्रबंधन आदि जैसे विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है।"
निकट भविष्य में, बैंकों के लिए आसान एसेट लाइबिलिटी मैनेजमेंट (एएलएम) और लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए प्राथमिक उपकरण के रूप में 14-डे वेरिएबल रेट रेपो (वीआरआर) के बजाय डेली वीआरआर के पक्ष में लिक्विडिटी फ्रेमवर्क में कुछ बदलाव हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, अस्थिर वैश्विक गतिशीलता के कारण आरबीआई को सख्त वित्तीय स्थितियों के किसी भी जोखिम को प्रबंधित करने में तेज रहने की जरूरत होगी, विशेष रूप से सेंटीमेंट/पूंजी प्रवाह को शॉक के कारण उभरते बाजारों से उच्च जोखिम प्रीमियम की जरूरत होगी।"
रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापार युद्ध से जुड़ी परेशानियों की सीमा स्पष्ट नहीं है, लेकिन भारत में मौद्रिक नीति को भारी काम करना पड़ सकता है। एंजेल वन, आयनिक एसेट में मैक्रो स्ट्रैटेजिस्ट और ग्लोबल इक्विटीज फंड एडवाइजर अंकिता पाठक के अनुसार, आरबीआई बुधवार को दरों में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है, साथ ही मौजूदा 'न्यूट्रल' से उदार रुख की ओर बदलाव की उम्मीद है।
पाठक ने उल्लेख किया, "जहां तक ​​टैरिफ का सवाल है, भारत एशिया के बाकी हिस्सों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन वैश्विक मंदी की स्थिति में इसका असर देश पर भी पड़ सकता है। ट्रंप के टैरिफ पर चीन की प्रतिक्रिया एशियाई केंद्रीय बैंकों (आरबीआई सहित) के लिए महत्वपूर्ण होगी और यह मुद्रा और दरों दोनों के लिए दिशा तय करेगी।"
भारत को ट्रंप के टैरिफ से पहले भी 'मौद्रिक रिफ्लेशन' की जरूरत थी और विकास को समर्थन देने के लिए इसकी आवश्यकता थी। साथ ही ऐसा करने की क्षमता अब सबसे मजबूत है। इसलिए, इसे दर में कटौती और सरप्लस लिक्विडिटी मेनटेनेंस दोनों के माध्यम से प्रवाहित होना चाहिए।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story