
नई दिल्ली। हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की कंपनी तमारा लेजर एक्सपीरियंस ने अगले पांच वर्षों में करीब 600 करोड़ रुपये निवेश करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपने होटल कारोबार को मौजूदा नौ परिचालन प्रॉपर्टीज से बढ़ाकर करीब 40 होटल तक पहुंचाना है। कंपनी के विस्तार प्लान में नया होटल ब्रांड ‘रे बाय तमारा’ (Rae by Tamara) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसे खासतौर पर तीर्थयात्रियों और आस्था आधारित यात्रा करने वाले लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
कंपनी की स्थापना इंफोसिस के सह-संस्थापक और पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसडी शिबुलाल की बेटी श्रुति शिबुलाल ने की है। तमारा ने अपने आगामी विस्तार को लेकर स्पष्ट किया है कि वह कारोबार बढ़ाने के लिए प्रमोटर पूंजी का इस्तेमाल करेगी और कंपनी को कर्ज-मुक्त रखने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी।
2030 तक 40 होटल का लक्ष्य
तमारा लेजर एक्सपीरियंस फिलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में नौ प्रॉपर्टीज का संचालन कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच साल में इस संख्या को लगभग 40 तक पहुंचाना है। इसके लिए करीब 600 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है।
कंपनी का मानना है कि भारत में घरेलू पर्यटन और धार्मिक यात्राओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। तीर्थस्थलों पर आने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ वहां गुणवत्तापूर्ण और व्यवस्थित हॉस्पिटैलिटी की मांग भी बढ़ रही है। तमारा इसी बाजार को अपने विस्तार का प्रमुख आधार बनाना चाहती है।
कंपनी के अनुसार, आने वाले वर्षों में नए होटल विकसित करने के साथ-साथ ऐसे स्थानों पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई जाएगी जहां धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की मजबूत संभावनाएं हैं।
‘रे बाय तमारा’ पर खास दांव
तमारा के विस्तार की रणनीति में ‘रे बाय तमारा’ को खास महत्व दिया गया है। कंपनी इसे भारत का पहला ‘फेथ-इंटेलिजेंट’ हॉस्पिटैलिटी ब्रांड बता रही है। इस ब्रांड की अवधारणा पारंपरिक अवकाश पर्यटन से अलग है।
जहां सामान्य होटल ब्रांड मुख्य रूप से छुट्टियां मनाने, बिजनेस ट्रैवल या पर्यटन के लिए आने वाले लोगों की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं रे बाय तमारा को तीर्थयात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
कंपनी का उद्देश्य ऐसे यात्रियों को आवास और आतिथ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिनकी यात्रा का केंद्र धार्मिक या आध्यात्मिक अनुभव होता है।
आस्था आधारित यात्राओं के लिए अलग अनुभव
भारत में धार्मिक पर्यटन का दायरा काफी व्यापक है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों, तीर्थस्थलों, धार्मिक आयोजनों और आध्यात्मिक केंद्रों की यात्रा करते हैं।
इन यात्रियों की जरूरतें सामान्य पर्यटकों से कई मामलों में अलग होती हैं। यात्रा का समय, भोजन की पसंद, पूजा-पाठ से जुड़ी सुविधाएं, धार्मिक स्थलों तक पहुंच और स्थानीय परंपराओं की समझ उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
तमारा का नया ब्रांड इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर अपनी हॉस्पिटैलिटी सेवाएं विकसित करना चाहता है। कंपनी का मानना है कि आस्था आधारित यात्रा को सिर्फ पर्यटन के नजरिए से देखने के बजाय उससे जुड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को भी होटल अनुभव का हिस्सा बनाया जा सकता है।
प्रमोटर निवेश से होगा विस्तार
तमारा की विस्तार योजना की एक खास बात यह है कि कंपनी अपने विकास के लिए पूरी तरह प्रमोटर निवेश पर निर्भर रहने की रणनीति अपना रही है। कंपनी ने संकेत दिया है कि विस्तार के लिए कर्ज का सहारा नहीं लिया जाएगा।
इसका अर्थ है कि करीब 600 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश प्रमोटर पूंजी के जरिए किया जाएगा। कंपनी खुद को पूरी तरह कर्ज-मुक्त रखने पर जोर दे रही है।
हॉस्पिटैलिटी उद्योग में बड़े पैमाने पर होटल विस्तार के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। जमीन, निर्माण, होटल संचालन, स्टाफिंग और ब्रांड विस्तार पर भारी निवेश करना पड़ता है। ऐसे में बिना कर्ज के विस्तार की रणनीति कंपनी के वित्तीय अनुशासन को दर्शाती है।
धार्मिक पर्यटन में अवसर
भारत में धार्मिक पर्यटन पहले से ही पर्यटन उद्योग का एक बड़ा हिस्सा है। देश में कई प्रमुख धार्मिक स्थल घरेलू यात्रियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं।
धार्मिक पर्यटन के विस्तार के साथ होटल, परिवहन, भोजन, स्थानीय गाइड और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ती है। तमारा इस व्यापक इकोसिस्टम में हॉस्पिटैलिटी को एक विशेष बाजार के रूप में देख रही है।
‘रे बाय तमारा’ के जरिए कंपनी का प्रयास इस मांग को संगठित और ब्रांडेड होटल अनुभव में बदलने का है। यदि यह मॉडल सफल होता है तो आने वाले वर्षों में धार्मिक पर्यटन से जुड़े अन्य होटल और हॉस्पिटैलिटी ब्रांड भी इसी तरह की रणनीति अपना सकते हैं।
मौजूदा कारोबार के विस्तार पर भी जोर
तमारा का फोकस केवल नए ब्रांड पर ही नहीं है। कंपनी अपने मौजूदा हॉस्पिटैलिटी पोर्टफोलियो को भी विस्तार देने की तैयारी कर रही है।
नौ मौजूदा प्रॉपर्टीज से 40 होटलों तक पहुंचने का लक्ष्य कंपनी के लिए बड़ा विस्तार होगा। इसके लिए नए शहरों और पर्यटन स्थलों की पहचान, प्रॉपर्टी विकास और संचालन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा।
कंपनी की रणनीति में अलग-अलग श्रेणी के यात्रियों की जरूरतों के अनुसार होटल सेवाओं को विकसित करना शामिल हो सकता है। हालांकि, आस्था केंद्रित हॉस्पिटैलिटी को कंपनी अपने आगामी विस्तार की प्रमुख पहचान बनाना चाहती है।
श्रुति शिबुलाल की अगुवाई में विस्तार
तमारा लेजर एक्सपीरियंस की स्थापना श्रुति शिबुलाल ने की है। वह इंफोसिस के सह-संस्थापक और पूर्व सीईओ एसडी शिबुलाल की बेटी हैं। उनके नेतृत्व में कंपनी ने हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की है।
अब कंपनी के सामने अगले पांच वर्षों में अपने होटल पोर्टफोलियो को कई गुना बढ़ाने की चुनौती है। इसके साथ ही नए ब्रांड को बाजार में स्थापित करना भी महत्वपूर्ण होगा।
कंपनी का कर्ज-मुक्त विस्तार मॉडल और प्रमोटर निवेश पर निर्भरता इस रणनीति को अलग बनाती है।
प्रतिस्पर्धा के बीच अलग पहचान बनाने की कोशिश
भारतीय हॉस्पिटैलिटी बाजार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के बड़े ब्रांड मौजूद हैं। ऐसे बाजार में किसी नए ब्रांड के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं है।
तमारा ‘फेथ-इंटेलिजेंट’ हॉस्पिटैलिटी के जरिए इसी चुनौती का जवाब देना चाहती है। कंपनी का मानना है कि तीर्थयात्रियों की विशिष्ट जरूरतों को समझकर उनके लिए तैयार किया गया होटल अनुभव उसे सामान्य होटल ब्रांडों से अलग पहचान दिला सकता है।
2030 तक 40 होटल और करीब 600 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य कंपनी की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तमारा कितनी तेजी से नई प्रॉपर्टीज विकसित करती है और ‘रे बाय तमारा’ को देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में किस तरह स्थापित करती है।
कुल मिलाकर, तमारा लेजर एक्सपीरियंस का नया विस्तार प्लान भारतीय हॉस्पिटैलिटी उद्योग में आस्था आधारित पर्यटन के बढ़ते बाजार को लक्ष्य करता है। कर्ज-मुक्त रहने की रणनीति और प्रमोटर पूंजी के सहारे विस्तार के साथ कंपनी ने 2030 तक एक बड़े होटल नेटवर्क का लक्ष्य तय किया है। यदि कंपनी अपनी योजना को निर्धारित समय में लागू करने में सफल रहती है तो ‘रे बाय तमारा’ धार्मिक पर्यटन के लिए एक नए हॉस्पिटैलिटी मॉडल के रूप में उभर सकता है।





