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नई दिल्ली। दशहरा, दिवाली और छठ पूजा से पहले आम लोगों के लिए राहत की खबर है। अगस्त में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद देश के कई प्रमुख शहरों में चीनी के दाम अब तेजी से नीचे आने लगे हैं। दिल्ली, कानपुर, रायपुर, मुंबई, रांची, कोलकाता, गुवाहाटी और हैदराबाद जैसे शहरों में खुदरा कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। सरकार की ओर से आयात की अनुमति, जमाखोरी पर सख्ती और बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के उपायों का असर अब धीरे-धीरे खुदरा कीमतों पर दिखाई देने लगा है।
ताजा बाजार आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 57 रुपये प्रति किलो तक आ गया है। रांची में भी कीमत लगभग 57 रुपये किलो दर्ज की गई। अगस्त में इन्हीं बाजारों में चीनी की कीमत 68 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इस लिहाज से कई शहरों में ऊंचे स्तर से 10 से 13 रुपये प्रति किलो तक राहत मिल चुकी है।
यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले दिनों में दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार हैं। त्योहारों के दौरान घरों, मिठाई की दुकानों, होटल-रेस्तरां और खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में यदि कीमतों में नरमी जारी रहती है तो इसका फायदा सीधे घरेलू बजट और मिठाई कारोबार को मिल सकता है।
अगस्त में अचानक आसमान पर पहुंच गए थे दाम
अगस्त में चीनी के बाजार में अचानक जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। दिल्ली में 12 अगस्त को खुदरा भाव करीब 54 रुपये प्रति किलो था, जो 22 अगस्त तक बढ़कर करीब 68 रुपये हो गया था। यानी महज दस दिनों में दिल्ली में चीनी करीब 14 रुपये किलो महंगी हो गई थी।
दूसरे शहरों में भी लगभग ऐसी ही स्थिति थी। रांची में भाव 70 रुपये किलो तक पहुंच गया था। गुवाहाटी में कीमत 71 रुपये तक गई, जबकि रायपुर, मुंबई और अन्य बड़े बाजारों में भी चीनी 68 से 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई थी।
कीमतों में अचानक आए इस उछाल ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। खासतौर पर इसलिए क्योंकि त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला था और मांग बढ़ने पर दाम और ऊपर जाने की आशंका थी।
सरकार बोली जमाखोरी से बढ़े थे दाम
सरकार के मुताबिक अगस्त में कीमतों में हुई तेज बढ़ोतरी के पीछे वास्तविक मांग से ज्यादा जमाखोरी और भविष्य में कीमत बढ़ने की आशंका में स्टॉक रोकना महत्वपूर्ण कारण था।
खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने 10 सितंबर को कहा कि त्योहारों के दौरान कीमत बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। सरकार ने चीनी उद्योग को पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने को कहा है।
सरकार ने साफ संकेत दिया है कि यदि बाजार में फिर से असामान्य तरीके से कीमत बढ़ती है तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
10 लाख टन ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है।
सरकार के मुताबिक इस कोटे के तहत अब तक करीब आठ लाख मीट्रिक टन के आयात के लिए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। भारत सामान्य तौर पर दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल रहता है, लेकिन घरेलू कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी के बाद आपूर्ति बढ़ाने के लिए आयात का रास्ता अपनाया गया।
भारत लगभग एक दशक में पहली बार ब्राजील से भी चीनी आयात कर रहा है। सरकार का उद्देश्य साफ है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक रहे और त्योहारों की बढ़ती मांग के दौरान कृत्रिम कमी पैदा न होने पाए।
मिलों से निकलने वाली चीनी करीब 20 फीसदी सस्ती
सरकारी उपायों का सबसे बड़ा असर एक्स-मिल कीमतों पर देखने को मिला है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 28 अगस्त को बताया था कि हाल के उच्च स्तर की तुलना में एक्स-मिल चीनी के भाव करीब 20 प्रतिशत नीचे आ चुके हैं।
एक्स-मिल कीमत वह भाव होता है जिस पर चीनी मिल से आगे बाजार के लिए चीनी निकलती है। इस स्तर पर कीमत कम होने का असर थोक बाजार और उसके बाद खुदरा दुकानों तक पहुंचता है।
हालांकि इसका पूरा फायदा उपभोक्ता तक पहुंचने में थोड़ा समय लगता है। इसकी वजह यह है कि कई थोक और खुदरा व्यापारियों के पास पहले से ऊंची कीमत पर खरीदा गया स्टॉक मौजूद रहता है।
दिल्ली और रांची में 57 रुपये तक पहुंचा भाव
8 सितंबर के बाजार आंकड़ों में दिल्ली में चीनी करीब 57 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई। कानपुर में भी कीमत 57 रुपये रही। रायपुर में करीब 56 रुपये, मुंबई में 56 रुपये और रांची में 57 रुपये प्रति किलो भाव दर्ज किया गया।
कोलकाता और गुवाहाटी में कीमत लगभग 58 रुपये रही, जबकि हैदराबाद में 57 और चेन्नई में करीब 60 रुपये प्रति किलो भाव रहा।
3 सितंबर के आसपास दिल्ली और रांची में कीमत लगभग 61 रुपये किलो थी। यानी सितंबर के शुरुआती दिनों में भी खुदरा बाजार में नरमी का सिलसिला जारी रहा।
स्थानीय बाजार और दुकान के हिसाब से वास्तविक खुदरा भाव में कुछ अंतर संभव है।
देश का औसत खुदरा भाव भी नीचे
सरकारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर की शुरुआत में देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत भी नीचे आई थी। एक सप्ताह में औसत खुदरा मूल्य 65.08 रुपये प्रति किलो से करीब 3.85 प्रतिशत घटकर 62.57 रुपये प्रति किलो रह गया।
इसी दौरान औसत थोक मूल्य भी घटकर करीब 57.62 रुपये प्रति किलो पर आ गया था।
हालांकि राहत के बावजूद चीनी अभी सामान्य स्तर की तुलना में महंगी बनी हुई है। अगस्त में कीमतों में जो असामान्य तेजी आई थी, उसका पूरा असर अभी खत्म नहीं हुआ है।
बाजार में आएगी 2.5 लाख टन अतिरिक्त चीनी
उपभोक्ताओं के लिए एक और राहत की खबर यह है कि देश की पोर्ट आधारित रिफाइनरियां करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में उतार सकती हैं।
श्री रेणुका शुगर्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार के मुताबिक व्यापार नीति में बदलाव के बाद रिफाइनरियों ने लगभग 2.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में बेचने के लिए कोटा मांगा है।
इस अतिरिक्त सप्लाई से आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ सकती है। ज्यादा आपूर्ति कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद कर सकती है।
15 अक्टूबर से शुरू हो सकती है मिलों में पेराई
त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने मिलों को 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा है। सामान्य स्थिति की तुलना में इसे लगभग एक महीने पहले शुरू करने की तैयारी है।
नई फसल की चीनी बाजार में जल्दी आने से अक्टूबर और नवंबर के दौरान सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।
इसी अवधि में दशहरा, दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के कारण चीनी की मांग काफी अधिक रहती है। इसलिए नई फसल की सप्लाई कीमतों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
दशहरा दिवाली और छठ से पहले बड़ी राहत
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग सामान्य तौर पर बढ़ जाती है। त्योहारों पर मिठाइयां और दूसरे मीठे खाद्य पदार्थ बड़े पैमाने पर बनाए जाते हैं। दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई की दुकानों की मांग काफी बढ़ जाती है। इसके बाद उत्तर भारत और पूर्वी भारत में छठ पूजा के दौरान भी चीनी और गुड़ की खपत बढ़ती है।
ऐसे समय में यदि चीनी 68 से 70 रुपये के बजाय 55 से 60 रुपये के दायरे में रहती है तो घरेलू उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों को भी राहत मिलेगी।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एक्स-मिल और थोक कीमतों में आई पूरी गिरावट अभी खुदरा बाजार तक नहीं पहुंची है।
क्या चीनी और सस्ती होगी?
चीनी उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर के मुताबिक एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट का फायदा धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।
लेकिन कीमतों का आगे का रुख नई फसल, आयात की रफ्तार, त्योहारों की मांग और बाजार में स्टॉक की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
फिलहाल अगस्त के रिकॉर्ड स्तर से चीनी की कीमत नीचे आना उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली से रांची और रायपुर से मुंबई तक कई शहरों में भाव घटे हैं। अब सरकार की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और कीमतें फिर से बेकाबू न हों।
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