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ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर संभव: CRISIL

Kavita2
18 Jun 2026 11:10 AM IST
ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत की आर्थिक वृद्धि पर असर संभव: CRISIL
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Business बिजनेस: रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि अगर ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका भारत की आर्थिक वृद्धि पर व्यापक असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इसका सबसे अधिक प्रभाव मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा।

क्रिसिल का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में ऊर्जा लागत का हिस्सा काफी महत्वपूर्ण है और कई उद्योगों की उत्पादन लागत सीधे तौर पर ऊर्जा कीमतों पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि ईंधन और ऊर्जा से जुड़ी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी बनी रहती है, तो इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता पर दबाव पड़ेगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में कुल खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा और उससे जुड़े संसाधनों पर होता है। यही कारण है कि इन क्षेत्रों पर ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का सीधा और गहरा प्रभाव पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा लागत बढ़ने से न केवल उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ती है, बल्कि इससे वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे महंगाई पर भी दबाव बनता है। इसका असर उपभोक्ता मांग पर भी पड़ सकता है, जो आर्थिक विकास की गति को धीमा कर सकता है।

क्रिसिल ने यह भी कहा है कि यदि ऊर्जा कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो कंपनियों को अपने खर्च को संतुलित करने के लिए निवेश योजनाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। इससे नए प्रोजेक्ट्स और विस्तार योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, जो पहले से ही वैश्विक और घरेलू चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऊर्जा लागत बढ़ने से और अधिक दबाव में आ सकता है। इसी तरह, कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी कच्चे माल और परिचालन लागत बढ़ने की संभावना जताई गई है।

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा कीमतों की स्थिरता आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि ऊर्जा लागत नियंत्रित रहती है, तो उद्योगों को राहत मिल सकती है और विकास दर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल, रिपोर्ट ने नीति निर्माताओं के लिए यह संकेत दिया है कि ऊर्जा प्रबंधन और लागत नियंत्रण पर ध्यान देना आवश्यक है, ताकि आर्थिक विकास की गति प्रभावित न हो।

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