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देश में क्रूड और LNG इम्पोर्ट में उछाल

Rajeshwari Nishad
31 Oct 2026 3:51 PM IST
देश में क्रूड और LNG इम्पोर्ट में उछाल
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बिज़नेस। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, समुद्री जहाजों पर हमलों और तेल की आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के बीच भारत ने अक्टूबर 2026 में कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात में नया रिकॉर्ड बनाया है। समुद्री व्यापार से जुड़ी खुफिया जानकारी और ऊर्जा बाजार का विश्लेषण करने वाली कंपनी केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में भारत का कच्चे तेल का आयात लगभग 56 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। वहीं LNG का आयात बढ़कर रिकॉर्ड 27 लाख टन हो गया।
खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध और समुद्री मार्गों पर असुरक्षा के कारण तेल एवं गैस की ढुलाई महंगी हो रही है। इसके बावजूद भारतीय रिफाइनरियों और गैस कंपनियों ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए अलग-अलग देशों से खरीदारी बढ़ाई है। रूस, अंगोला, वेनेजुएला और अमेरिका से कच्चे तेल की खेप आईं, जबकि कतर और संयुक्त अरब अमीरात से LNG की आपूर्ति बढ़ी।
अक्टूबर में कितना तेल और गैस आया भारत?
कच्चे तेल का दैनिक आयात
56.3 लाख
बैरल प्रतिदिन, अक्टूबर के अस्थायी आंकड़े
LNG आयात
27 लाख
आखिर अक्टूबर में अचानक क्यों बढ़ा तेल का आयात?
भारत में पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की मांग पूरी करने के लिए रिफाइनरियों को लगातार कच्चे तेल की जरूरत होती है। अक्टूबर में भारतीय रिफाइनरियां अपनी स्थापित क्षमता के मुकाबले बहुत ऊंचे स्तर पर काम कर रही थीं।
आंकड़ों के अनुसार, देश की लगभग 53.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्थापित रिफाइनिंग क्षमता के मुकाबले सितंबर में करीब 56.2 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का प्रसंस्करण हुआ। यानी कई रिफाइनरियां निर्धारित क्षमता से अधिक उत्पादन कर रही थीं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्टूबर में रिफाइनरियों के रखरखाव के लिए अपेक्षाकृत कम बंदी और ईंधन की निरंतर मांग ने आयात बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद पेट्रोल पंपों और औद्योगिक उपभोक्ताओं तक ईंधन की आपूर्ति प्रभावित न हो।
रूस के साथ अंगोला और वेनेजुएला से बढ़ी खरीदारी
अक्टूबर में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा। रूस से आयात बढ़कर लगभग 19.7 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो कुल आयात का करीब 35 प्रतिशत था।
हालांकि, जुलाई के मुकाबले रूस की हिस्सेदारी कम हुई है। जुलाई में भारत के तेल आयात में रूस का हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत था।
इस बीच भारतीय कंपनियों ने अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों से खरीदारी बढ़ाई। अंगोला से आयात सितंबर के लगभग 36 हजार बैरल प्रतिदिन से बढ़कर अक्टूबर में 3.35 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। वेनेजुएला से आयात भी बढ़कर लगभग 3.45 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया।
अमेरिका और ब्राजील से आने वाले तेल की मात्रा में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस बदलाव से साफ है कि भारत अब केवल एक या दो आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों से तेल खरीदने पर जोर दे रहा है।
कतर और UAE से LNG आयात में बड़ी बढ़ोतरी
कच्चे तेल के साथ भारत में प्राकृतिक गैस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। अक्टूबर में LNG आयात 17.4 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 27 लाख टन पहुंच गया।
इस बढ़ोतरी के पीछे बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग और सिटी गैस वितरण नेटवर्क की बढ़ती जरूरत प्रमुख कारण रहे। घरेलू गैस उत्पादन में कमी के कारण आयात पर निर्भरता भी बढ़ी है।
कतर और संयुक्त अरब अमीरात से अतिरिक्त LNG खेप आने से भारतीय कंपनियों को अपनी जरूरत पूरी करने में मदद मिली। प्राकृतिक गैस का उपयोग बिजली संयंत्रों, उर्वरक कारखानों, उद्योगों और शहरी गैस नेटवर्क में होता है। इसलिए इसकी आपूर्ति प्रभावित होने पर कई क्षेत्रों पर
असर
पड़ सकता है।
समुद्री रास्ते खतरनाक, फिर भी कैसे पहुंच रहा तेल?
मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। वहीं लाल सागर और अन्य मार्गों पर सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बने हुए हैं।
इन परिस्थितियों में भारतीय कंपनियों ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और समुद्री मार्गों का इस्तेमाल बढ़ाया। अक्टूबर में स्वेज नहर के पश्चिमी क्षेत्रों से आने वाले तेल की मात्रा सितंबर के लगभग छह लाख बैरल प्रतिदिन से दोगुनी होकर करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई।
दूसरी ओर पश्चिम एशिया से भारत का कच्चे तेल का आयात सितंबर के लगभग 27 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर अक्टूबर में 23 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। इससे पता चलता है कि कुल आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद पारंपरिक खाड़ी आपूर्ति मार्गों पर दबाव बना हुआ है।
महंगी ढुलाई से भारत के सामने नई चुनौती
तेल की उपलब्धता के साथ उसकी ढुलाई की लागत भी चिंता का विषय बनी हुई है। रॉयटर्स की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के पश्चिमी बंदरगाहों से भारत तक यूराल क्रूड पहुंचाने की परिवहन लागत कुछ सौदों में लगभग 30 डॉलर प्रति बैरल या उससे अधिक हो गई है। सितंबर में यह लागत करीब 20 डॉलर प्रति बैरल थी।
जहाजों की कमी, सुरक्षा जोखिम और लंबे समुद्री रास्तों के कारण मालभाड़ा बढ़ रहा है। इससे सस्ते कच्चे तेल का लाभ भी कम हो सकता है।
क्या भारत ने अपना पूरा तेल रिजर्व भर लिया?
अक्टूबर में रिकॉर्ड आयात का मतलब यह नहीं है कि भारत के सभी रणनीतिक तेल भंडार पूरी तरह भर गए हैं। आयात किए गए कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा रिफाइनरियों में प्रसंस्करण के लिए जाता है। इसके अतिरिक्त कंपनियां अपने परिचालन भंडार बनाए रखती हैं।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व अलग व्यवस्था है, जिसका उपयोग गंभीर आपूर्ति संकट जैसी परिस्थितियों में किया जा सकता है। अक्टूबर में इन भंडारों के पूरी तरह भर जाने की पुष्टि उपलब्ध आंकड़ों से नहीं होती।
फिलहाल रिकॉर्ड आयात का सबसे महत्वपूर्ण कारण घरेलू ईंधन मांग को पूरा करना, रिफाइनरियों का उत्पादन जारी रखना और युद्ध के बीच आपूर्ति जोखिम कम करना दिखाई देता है।
आने वाले महीनों में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त तेल और गैस की उपलब्धता के साथ उनकी लागत को नियंत्रित रखना होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और मालभाड़ा बढ़ने पर भारतीय कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है। ऐसे में अलग-अलग देशों से ऊर्जा खरीदने की रणनीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
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