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Amazon- Future Deal मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अगुआई वाली पीठ ने फ्यूचर समूह की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने कहा कि हम फैसला सुरक्षित रखते हैं।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर फ्यूचर समूह (Future Group) की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के आपात फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अगुआई वाली पीठ ने फ्यूचर समूह की तरफ से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ ने कहा कि हम फैसला सुरक्षित रखते हैं। इस मामले में दायर चारों विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) पर सुनवाई हो चुकी है और हमें बहुत काम करना है। बहरहाल मैं कोई लंबा फैसला नहीं लिखूंगा।
इस पीठ में न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं। पीठ ने सुनवाई के दौरान अमेजन और फ्यूचर समूह की कंपनियों के वकीलों को यह सुझाव भी दिया कि सिंगापुर मध्यस्थता केंद्र के अंतिम फैसले के खिलाफ फ्यूचर समूह की अपीलों की सुनवाई करने की अनुमति हाईकोर्ट की एकल पीठ को देनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि ये अर्जियां मध्यस्थता केंद्र के आपात फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं लेकिन मध्यस्थता केंद्र का अंतिम निर्णय भी आ जाने के बाद शायद इन पर विचार करना प्रासंगिक नहीं रह गया है। पीठ ने कहा कि आपकी पहली एसएलपी (दिल्ली हाईकोर्ट के) न्यायमूर्ति जेआर मिधा के आदेश को चुनौती देती है, हमने कहा था कि उस आदेश का अनुपालन न हो। हमने दिल्ली हाईकोर्ट को कभी नहीं कहा कि वह इस मामले को न सुने।
सुप्रीम कोर्ट फ्यूचर समूह की तरफ से दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई करता रहा है, जिनमें सिंगापुर मध्यस्थता केंद्र के आपात फैसले पर रोक लगाने से हाईकोर्ट के इनकार को चुनौती दी गई है। मध्यस्थता केंद्र ने अपने आपात फैसले में रिलायंस रिटेल के साथ फ्यूचर समूह के 24,731 करोड़ रुपये के बिक्री सौदे पर आगे बढ़ने की रोक लगा दी थी। इससे सौदे को चुनौती देने वाली ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन को बड़ी राहत मिली थी।
अमेजन इस मामले को बीते साल अक्टूबर में सिंगापुर मध्यस्थता केंद्र में ले आई थी। उसका कहना था कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड ने प्रतिद्वंद्वी कंपनी रिलायंस रिटेल के साथ बिक्री करार कर वर्ष, 2019 में अमेजन के साथ हुए निवेश समझौते का उल्लंघन किया है। रिलायंस रिटेल के साथ फ्यूचर रिटेल के विलय का सौदा लगातार कानूनी विवादों में फंसा हुआ है। यह मामला कई नियामकीय और न्यायिक प्रतिष्ठानों में विचार के लिए लाया जा चुका है।
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