
Bengaluru बेंगलुरु : भारत की सबसे बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनी सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी विदेशी अधिग्रहण डील की घोषणा की है। कंपनी ने अमेरिका की प्रमुख हेल्थकेयर कंपनी ऑर्गनॉन एंड कंपनी को 11.75 अरब डॉलर में खरीदने का फैसला किया है। यह डील भारतीय फार्मा सेक्टर की अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खरीद मानी जा रही है।
ऑर्गनॉन एंड कंपनी एक 103 साल पुरानी न्यूयॉर्क-लिस्टेड हेल्थकेयर कंपनी है, जो विशेष रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य (Women’s Health) से जुड़े उत्पादों और दवाओं में विशेषज्ञता रखती है। इस अधिग्रहण के जरिए सन फार्मा अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने के साथ-साथ ग्लोबल बाजार में अपनी पकड़ और भी गहरी करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
कंपनी के अनुसार, इस डील के पूरा होने के बाद सन फार्मा दुनिया की टॉप 25 फार्मास्यूटिकल कंपनियों में शामिल हो जाएगी। यह भारतीय फार्मा उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारत की एक कंपनी वैश्विक स्तर पर बड़ी फार्मा कंपनियों की सूची में मजबूत स्थिति हासिल करेगी।
इस अधिग्रहण को सन फार्मा के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कंपनी का रेवेन्यू लगभग दोगुना होकर 12.4 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही सन फार्मा का बिजनेस मॉडल भी बदलने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अब तक सन फार्मा को मुख्य रूप से एक जेनेरिक दवा (generic drugs) बनाने वाली कंपनी के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन ऑर्गनॉन के अधिग्रहण के बाद यह कंपनी ग्लोबल स्पेशियलिटी ड्रगमेकर (specialty drugmaker) के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगी। इससे कंपनी के रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और प्रीमियम दवाओं के सेगमेंट में विस्तार होगा।
कंपनी के संस्थापक और अरबपति उद्योगपति दिलीप सांघवी के लिए यह अधिग्रहण एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। उन्होंने 1983 में छोटे स्तर पर सन फार्मा की शुरुआत की थी और आज यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी फार्मा कंपनियों में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह डील न केवल सन फार्मा के वैश्विक विस्तार को गति देगी, बल्कि भारतीय फार्मा सेक्टर के लिए भी एक मजबूत संकेत है कि घरेलू कंपनियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े अधिग्रहण करने में सक्षम हो रही हैं।
हालांकि, इस डील के पूरा होने के लिए नियामक मंजूरी और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अभी बाकी हैं। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह अधिग्रहण औपचारिक रूप से लागू होगा।
इस बड़े कदम के साथ सन फार्मा ने वैश्विक फार्मा उद्योग में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है, जिसका असर आने वाले वर्षों में कंपनी के विकास और अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पर साफ दिखाई दे सकता है।





