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मजबूत डॉलर ने बिगाड़ा सोने-चांदी का खेल, कीमतों में आई गिरावट

Ratna Netam
1 Aug 2026 9:05 PM IST
मजबूत डॉलर ने बिगाड़ा सोने-चांदी का खेल, कीमतों में आई गिरावट
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मुंबई : वैश्विक बाजार में मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर घरेलू बुलियन बाजार पर भी देखने को मिला है। सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में पहचाने जाने वाले सोने की मांग पर दबाव बढ़ने से इस सप्ताह सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर में मजबूती के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर भारतीय वायदा बाजार में भी दिखाई दिया।

इस सप्ताह सोने के वायदा भाव में करीब 1.16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान सोना वायदा 0.06 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,41,599 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, दूसरी ओर चांदी वायदा में गिरावट का सिलसिला जारी रहा। सितंबर डिलीवरी वाली चांदी एमसीएक्स पर 1.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार करती दिखाई दी। कारोबार के दौरान चांदी वायदा भाव 2,17,488 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया।

बाजार जानकारों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं में सोना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग प्रभावित होती है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से निवेशकों का रुझान सोने जैसे गैर-ब्याज वाले एसेट से हटकर बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्पों की ओर बढ़ जाता है।

सोने को परंपरागत रूप से आर्थिक अनिश्चितता और बाजार में अस्थिरता के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। हालांकि, इस समय वैश्विक आर्थिक संकेतकों में बदलाव और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर जारी अटकलों के बीच निवेशकों ने सोने में खरीदारी को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर इंडेक्स की चाल और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि डॉलर में मजबूती बनी रहती है और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तर पर रहती है तो सोने पर दबाव जारी रह सकता है। वहीं, अगर वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है।

घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय रुझानों के साथ-साथ रुपये की मजबूती और कमजोरी का भी असर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव होने पर आयात लागत प्रभावित होती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

चांदी की कीमतों में गिरावट को लेकर बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग में बदलाव और वैश्विक आर्थिक संकेतों ने इसके भाव को प्रभावित किया है। चांदी का उपयोग केवल आभूषणों में ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। ऐसे में औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े संकेतों का असर इसकी कीमतों पर देखने को मिलता है।

फिलहाल बुलियन बाजार में निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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