
बिज़नेस: देश के बुनियादी उद्योगों यानी कोर सेक्टर ने जून महीने में शानदार प्रदर्शन किया है। नौ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योगों के उत्पादन में जून में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले पांच महीनों में सबसे अधिक है। सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने से कोर इंडस्ट्री को मजबूती मिली है। सरकार द्वारा जारी नए आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक गतिविधियों में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में नौ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 5 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले मई महीने में कोर सेक्टर की ग्रोथ 3.2 प्रतिशत रही थी, जबकि जून 2025 में यह केवल 1.1 प्रतिशत थी। जून के बेहतर प्रदर्शन ने अर्थव्यवस्था के औद्योगिक क्षेत्र को सकारात्मक संकेत दिए हैं।
सरकार ने हाल ही में कोर इंडस्ट्री इंडेक्स के लिए नया बेस ईयर 2022-23 लागू किया है। इससे पहले 2011-12 को आधार वर्ष माना जाता था। नई सीरीज में कई बदलाव किए गए हैं और अब कोर सेक्टर में लौह अयस्क को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही बुनियादी उद्योगों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है।
जून महीने में सबसे ज्यादा मजबूती सीमेंट और बिजली क्षेत्र में देखने को मिली। आंकड़ों के अनुसार, सीमेंट और बिजली उत्पादन में 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और ऊर्जा मांग में बढ़ोतरी को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
वहीं, नई सीरीज में शामिल किए गए लौह अयस्क उत्पादन में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून में लौह अयस्क का उत्पादन 43.9 प्रतिशत बढ़ा। देश में स्टील और निर्माण गतिविधियों के लिए लौह अयस्क बेहद महत्वपूर्ण कच्चा माल है, इसलिए इसमें तेजी को औद्योगिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में गिरावट भी दर्ज की गई। जून में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों और उर्वरक उत्पादन में कमी आई। इन क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन के बावजूद सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क जैसे मजबूत सेक्टरों ने कुल कोर इंडस्ट्री ग्रोथ को सहारा दिया।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान नौ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह वृद्धि केवल 1 प्रतिशत रही थी। इससे पता चलता है कि पहली तिमाही में औद्योगिक गतिविधियों में सुधार हुआ है।
नई बेस ईयर सीरीज में सरकार ने इंडेक्स तैयार करने के तरीके में भी बदलाव किए हैं। अब स्टील इंडेक्स को नेट प्रोडक्शन की जगह ग्रॉस प्रोडक्शन के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के साथ बेहतर तालमेल बनाना है।
इसके अलावा कोयला इंडेक्स में भी बदलाव किया गया है। अब इसमें केवल कच्चे कोयले यानी रॉ कोल को शामिल किया जाएगा, ताकि धुले हुए कोयले और कोयले से जुड़े अन्य उत्पादों की दोहरी गणना से बचा जा सके।
नई सीरीज के तहत अलग-अलग सेक्टरों को दिए गए वेटेज में भी बदलाव किया गया है। इसमें बिजली क्षेत्र का सबसे अधिक योगदान है, इसके बाद रिफाइनरी उत्पाद और स्टील का स्थान आता है। सरकार का कहना है कि नए आधार वर्ष और बदलावों से कोर सेक्टर के प्रदर्शन की तस्वीर ज्यादा सटीक तरीके से सामने आएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोर सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन देश की आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन नौ उद्योगों का सीधा असर निर्माण, परिवहन, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है। सीमेंट, बिजली और खनन क्षेत्र में तेजी आने से आने वाले महीनों में औद्योगिक उत्पादन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार, जुलाई 2026 के लिए अगला कोर इंडस्ट्री इंडेक्स अपडेट 20 अगस्त 2026 को जारी किया जाएगा। नए आंकड़ों के साथ अब देश की औद्योगिक वृद्धि को मापने का तरीका और अधिक व्यापक हो गया है।





