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Stock Market की तेजी पर ब्रेक: सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, जानिए कल का मार्केट मूड

Harrison
8 Oct 2025 6:54 PM IST
Stock Market की तेजी पर ब्रेक: सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, जानिए कल का मार्केट मूड
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Business,व्यापार : शेयर बाजार में 4 दिनों की तेजी पर विराम, लुढ़के सेंसेक्स-निफ्टी, जानें कल कैसा रहेगा मार्केट का हाल - लगातार चार कारोबारी सत्रों की मजबूती के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर बंद हुए। वैश्विक संकेतों में कमजोरी, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के बढ़ने जैसे कारकों ने बाजार की चाल को प्रभावित किया।
❖ दिनभर का बाजार हाल:
बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 300 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 100 अंकों से ज्यादा फिसल गया।
सेंसेक्स करीब 316 अंक गिरकर 66,665 के आसपास बंद हुआ।
निफ्टी 50 में 109 अंकों की गिरावट देखी गई और यह 19,805 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार में दिन की शुरुआत कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच हल्की गिरावट के साथ हुई थी, लेकिन दोपहर बाद गिरावट गहराई और अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में चले गए।
किन सेक्टर्स पर दिखा असर?
इस गिरावट में बैंकिंग, आईटी, ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। हालांकि कुछ FMCG और फार्मा स्टॉक्स में सीमित खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली।
बैंक निफ्टी में करीब 0.8% की गिरावट रही।
आईटी सेक्टर के प्रमुख स्टॉक्स जैसे TCS, Infosys, Wipro में भी दबाव दिखा।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लाल निशान में बंद हुए, हालांकि गिरावट सीमित रही।
गिरावट की वजहें:
मुनाफावसूली: लगातार चार दिन की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना।
वैश्विक संकेत: अमेरिका और एशियाई बाजारों में कमजोरी, जिससे निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा।
बॉन्ड यील्ड: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल से इक्विटी बाजार पर दबाव बढ़ा।
क्रूड ऑयल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भी चिंता का कारण बनी।
डॉलर इंडेक्स: डॉलर की मजबूती से एफआईआई निवेश में सुस्ती आई।
विदेशी निवेशकों की भूमिका:
FII (Foreign Institutional Investors) ने आज के सत्र में बिकवाली का रुख अपनाया, जो बाजार की गिरावट का एक अहम कारण रहा। वहीं, DII (Domestic Institutional Investors) ने कुछ हद तक सपोर्ट दिया, लेकिन वह पर्याप्त नहीं था।
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