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शेयर बाजार की टाइमिंग बदली, नया CAS सिस्टम लागू

Saba Naaz
31 July 2026 8:51 PM IST
शेयर बाजार की टाइमिंग बदली, नया CAS सिस्टम लागू
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नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में ट्रेडिंग व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक बड़ा बदलाव किया है। अगस्त से फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट में शामिल शेयरों के लिए नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस नए सिस्टम का उद्देश्य शेयरों के अंतिम भाव यानी क्लोजिंग प्राइस में होने वाली संभावित हेरफेर को रोकना और सही कीमत तय करना है।

SEBI के निर्देश के बाद एक्सचेंज अब F&O स्टॉक्स के लिए पुराने वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) सिस्टम की जगह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू करेंगे। यह नया सेशन 15 मिनट का होगा और दोपहर 3:15 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा। इसी अवधि में खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाएंगे और एक संतुलन कीमत यानी इक्विलिब्रियम प्राइस के आधार पर शेयर का अंतिम क्लोजिंग प्राइस तय किया जाएगा।

अब तक किसी शेयर की क्लोजिंग प्राइस मुख्य रूप से बाजार बंद होने से पहले के आखिरी 30 मिनट यानी दोपहर 3 बजे से 3:30 बजे के बीच हुए ट्रेड की औसत कीमत के आधार पर तय होती थी। लेकिन नए CAS सिस्टम में आखिरी समय के बड़े ऑर्डर से कीमतों में अचानक बदलाव की संभावना कम हो जाएगी।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के दौरान निवेशकों और ट्रेडर्स के खरीद और बिक्री ऑर्डर एक साथ मिलाए जाएंगे। जिस कीमत पर सबसे अधिक खरीद और बिक्री के ऑर्डर मैच होंगे, उसे शेयर की अंतिम क्लोजिंग कीमत माना जाएगा। इससे बाजार में वास्तविक मांग और आपूर्ति के आधार पर कीमत तय होने में मदद मिलेगी।

HDFC सिक्योरिटीज के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नंदिश शाह के अनुसार, CAS सिस्टम से शेयरों की क्लोजिंग प्राइस अधिक सटीक तरीके से निर्धारित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनाए जाने वाले मानकों के अनुरूप है और इससे निवेशकों को लंबे समय में फायदा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए सिस्टम का सबसे ज्यादा फायदा म्यूचुअल फंड और बड़े संस्थागत निवेशकों को मिलेगा। 129 वेल्थ के फंड मैनेजर और पॉल एसेट के रिसर्च एनालिस्ट प्रसेनजीत पॉल ने बताया कि यह बदलाव आम रिटेल निवेशकों के लिए सीधे तौर पर बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इससे क्लोजिंग प्राइस ज्यादा सही होंगे। इसका असर म्यूचुअल फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) और पोर्टफोलियो वैल्यूएशन में सटीकता के रूप में दिखाई देगा।

SEBI ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि बाजार में कई बार आखिरी कुछ मिनटों में बड़े ऑर्डर देकर शेयरों की क्लोजिंग कीमत को प्रभावित करने की आशंका जताई जाती रही है। खासतौर पर इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स को क्लोजिंग प्राइस के आधार पर अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट करना पड़ता है। ऐसे में अंतिम समय के बड़े सौदों से ट्रैकिंग एरर बढ़ने का खतरा रहता है।

जेरोधा के फाउंडर नितिन कामथ ने भी इस मुद्दे पर कहा था कि आखिरी मिनट के बड़े ऑर्डर शेयरों और इंडेक्स की क्लोजिंग वैल्यू पर असर डाल सकते हैं। CAS सिस्टम में सभी ऑर्डर एक साथ मिलाकर एक ही कीमत पर पूरे किए जाएंगे, जिससे किसी एक बड़े ऑर्डर के जरिए कीमत प्रभावित करना मुश्किल होगा।

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि CAS लागू होने से आखिरी समय में होने वाले बड़े संस्थागत ट्रेड्स का प्रभाव कम होगा। इससे बेहतर प्राइस डिस्कवरी होगी और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।

हालांकि, शुरुआत में यह बदलाव केवल उन शेयरों पर लागू होगा जिनमें F&O ट्रेडिंग की अनुमति है। जिन शेयरों में F&O सुविधा नहीं है, उनके लिए सामान्य ट्रेडिंग व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। ऐसे शेयरों के लिए पोस्ट-क्लोजिंग सेशन का समय भी बदलकर दोपहर 3:50 बजे से शाम 4 बजे तक कर दिया गया है।

इसके अलावा इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भी ट्रेडिंग समय में बदलाव किया गया है। अब सभी ट्रेडिंग दिनों में डेरिवेटिव्स मार्केट की ट्रेडिंग अवधि पहले के 3:30 बजे के बजाय 3:40 बजे तक जारी रहेगी।

SEBI का यह कदम भारतीय शेयर बाजार को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए CAS सिस्टम से उम्मीद है कि क्लोजिंग प्राइस अधिक निष्पक्ष तरीके से तय होंगे और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

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